कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद एक बड़ा सियासी सस्पेंस खत्म हो गया है। कांग्रेस आलाकमान द्वारा राज्यसभा सीट का प्रस्ताव मिलने के बावजूद सिद्धारमैया ने इसे ठुकरा दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी दिलचस्पी राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है और वे वरुणा विधानसभा क्षेत्र के विधायक के रूप में कर्नाटक में ही रहकर जनसेवा जारी रखेंगे।
क्यों ठुकराया राज्यसभा का ऑफर?
सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से साफ कहा है कि वे दिल्ली जाने के बजाय राज्य की सक्रिय राजनीति में बने रहना चाहते हैं। वरुणा उनका पारंपरिक गढ़ है, जहां से वे 2008 से लगातार जुड़े हुए हैं। वे अपने शेष दो वर्षों के विधायक कार्यकाल को पूरा करना चाहते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी यह रणनीति 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। ‘अहिंदा’ (अल्पसंख्यक, हिंदू पिछड़े और दलित) वोट बैंक में उनकी गहरी पकड़ के कारण कांग्रेस उन्हें राज्य स्तर पर सक्रिय रखकर आगामी चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।
सत्ता हस्तांतरण: एक गरिमापूर्ण विदाई
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच पिछले तीन वर्षों से चल रहे नेतृत्व विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली में गहन मंत्रणा की थी। राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में आने का संकेत दिया था, लेकिन सिद्धारमैया के इंकार के बाद अब डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
बदलाव का यह कदम 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-incumbency) को कम करने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भावुक पल: मतभेदों के बीच दिखी गर्मजोशी
नेतृत्व परिवर्तन के औपचारिक निर्णय से पहले, बेंगलुरु में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच एक सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई। नाश्ते पर हुई इस बैठक में गृह मंत्री जी परमेश्वर भी मौजूद थे। बैठक की तस्वीरों ने राजनीतिक हलकों में सुर्खियां बटोरीं, जिनमें सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को गले मिलते और डीके शिवकुमार को सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लेते देखा गया। यह दृश्य सिद्धारमैया के प्रति डीके शिवकुमार के सम्मान और पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने वाला रहा।
अब राज्यसभा की सीटों का गणित क्या होगा?
इस वर्ष कर्नाटक से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। सिद्धारमैया के इंकार के बाद अब पार्टी अपने अन्य वरिष्ठ नेताओं को राज्यसभा भेजने की रणनीति पर काम कर रही है। संभावना है कि इन सीटों पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश को मौका दिया जा सकता है।
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