इस गाने पर बचपन से अब तक खूब किया होगा डांस, क्या आप जानते हैं इसके पीछे छिपी 1100 साल पुरानी दर्दभरी दास्तान?

मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली: सोचिए एक ऐसा गाना, जिसकी थाप सुनते ही आपके पैर खुद-ब-खुद थिरकने लगते हों, जिसे आपने बचपन से लेकर अब तक हर शादी, स्कूल के एनुअल फंक्शन और यहां तक कि जुम्बा क्लासेज में भी खूब एन्जॉय किया हो, उसके पीछे एक बेहद इमोशनल और दर्दभरी प्रेम कहानी छिपी हो तो? जी हां, हम बात कर रहे हैं मलाइका अरोड़ा और अरबाज खान पर फिल्माए गए एवरग्रीन सुपरहिट गाने ‘रंगीलो म्हारो ढोलना’ की। अक्सर लोग इसे एक आम डांस नंबर या नॉर्मल लव सॉन्ग समझ लेते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इस गाने का कनेक्शन राजस्थान की करीब 1100 साल पुरानी एक ऐतिहासिक प्रेम कथा से जुड़ा है।

फिल्म का नहीं बल्कि एक सुपरहिट पॉप एल्बम का हिस्सा था यह गाना

आज की पीढ़ी भले ही इसे किसी फिल्म का गाना समझती हो, लेकिन यह सॉन्ग साल 1999 में आए मशहूर इंडी-पॉप एल्बम ‘प्यार के गीत’ का हिस्सा था। इस गाने को अपनी बुलंद और खनकती आवाज से दिग्गज गायिका शुभा मुदगल ने सजाया था। यूट्यूब पर यह गाना आज भी अलग-अलग चैनल्स पर करोड़ों (मिलियन्स) व्यूज बटोर चुका है।

वीडियो में दिखाया गया है कि मलाइका अरोड़ा हाथ में एक चिट्ठी लिए अपने ‘ढोलना’ के आने की खुशी में झूमकर नाच रही हैं। तभी दूर से अरबाज खान एक फौजी की वर्दी में गाड़ी से आते दिखाई देते हैं और उन्हें देखकर मलाइका की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़ते हैं। यह वीडियो जितना खूबसूरत है, इसके पीछे की असली लोककथा उतनी ही हैरान करने वाली है।

3 साल की उम्र में बाल विवाह और फिर बिछड़ गए ‘ढोला-मारू’

दरअसल, यह पूरा गाना राजस्थान की मशहूर लोककथा ‘ढोला-मारू’ पर आधारित है। सदियों पुरानी इस कहानी के मुताबिक, नरवर के राजकुमार ‘ढोला’ और बीकानेर के पूंगल की राजकुमारी ‘मारू’ की शादी बचपन में ही कर दी गई थी। उस वक्त दूल्हे राजा यानी ढोला की उम्र महज 3 साल थी। पुराने जमाने में बाल विवाह तो हो जाता था, लेकिन लड़की के बड़ी होने पर ही उसका गौना (विदाई) किया जाता था।

वक्त बदला और दोनों बड़े हुए। इस बीच राजकुमार ढोला अपने बचपन की इस शादी की बात पूरी तरह भूल गए। बड़े होने पर उन्हें मालवणी नाम की एक दूसरी राजकुमारी से प्यार हो गया और उन्होंने उससे शादी कर ली। दूसरी तरफ, राजकुमारी मारू को बचपन से ही ढोला के नाम से चिढ़ाया-छेड़ा जाता था, इसलिए वह मन ही मन ढोला को अपना पति मान चुकी थीं और सालों से बस उसी का इंतजार कर रही थीं।

जब ढोला की दूसरी पत्नी ने रोके संदेश, तब मारू ने चली यह चाल

राजकुमारी मारू के पिता ने ढोला को पूंगल वापस बुलाने और गौना करने के लिए कई साल तक संदेश भेजे। लेकिन ढोला की दूसरी पत्नी मालवणी को इस बात का पता चल गया था। उसने डर और जलन के मारे मारू के भेजे हर संदेशवाहक को रास्ते में ही रुकवा दिया और कोई भी चिट्ठी ढोला तक पहुंचने नहीं दी। जब मारू और उनके पिता को इस साजिश का अहसास हुआ, तो उन्होंने ढोला तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक अनोखी तरकीब सोची।

उन्होंने राज्य के कुछ बेहद हुनरमंद ढोली (लोकगायकों) को बुलाया, जो घूम-घूमकर गाना गाते थे। मारू ने अपनी पूरी विरह वेदना और प्रेम कहानी को एक बेहद भावुक गीत के रूप में उन गायकों को रटा दिया। ये लोकगायक गाते-बजाते हुए ढोला के महल तक पहुंच गए। शुरुआत में तो पहरेदारों ने उन्हें मामूली मांगने वाला समझकर छोड़ दिया, लेकिन रात के वक्त उन्होंने ढोला के शयनकक्ष के बाहर जाकर वह दर्दभरा विरह गीत गाना शुरू किया।

गीत के बोल इतने मर्मस्पर्शी थे कि ढोला आधी रात को उठ बैठे और बेहद इमोशनल हो गए। जब उन्होंने गायकों को बुलाकर पूरी बात पूछी, तब जाकर उन्हें बचपन की अपनी पहली पत्नी ‘मारू’ और अपनी शादी की बात याद आई। हालांकि, उनकी दूसरी पत्नी ने उन्हें रोकने के लिए कई बहाने बनाए और साजिशें रचीं, लेकिन आखिरकार ढोला अपनी मारू को लेने पूंगल पहुंच ही गए। अपने पिया को सामने देख राजकुमारी मारू की खुशी का जो ठिकाना था, वही जश्न ‘आयो रे आयो रे म्हारो ढोलना’ गीत में झलकता है। राजस्थान की संस्कृति में आज भी यह लोकगीत अमर है।

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