‘अथ श्री महाभारत कथा’ के पीछे थी बॉलीवुड के इस दिग्गज गायक की आवाज, देशभक्ति गीतों से आज भी भर देते हैं रगों में जोश

टेलीविजन के इतिहास में जब भी सबसे लोकप्रिय और ऐतिहासिक धारावाहिकों की चर्चा होती है, तो बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ का नाम सबसे ऊपर आता है। 1988 के दौर में जब रविवार की सुबह दूरदर्शन पर यह धारावाहिक प्रसारित होता था, तो देश की सड़कें और गलियां पूरी तरह सूनी हो जाती थीं। धारावाहिक शुरू होते ही जैसे ही शंखनाद के साथ “अथ श्री महाभारत कथा…” की गूंज सुनाई देती थी, करोड़ों दर्शक हाथ जोड़कर टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाते थे। उस भारी-भरकम, गंभीर और रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज ने हर भारतीय के दिल में ऐसी जगह बनाई कि आज दशकों बाद भी उस शीर्षक गीत का प्रभाव रत्ती भर कम नहीं हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस दिव्य और ओजस्वी आवाज के पीछे बॉलीवुड का कौन सा दिग्गज पार्श्वगायक था? वह आवाज किसी और की नहीं, बल्कि भारतीय संगीत जगत के ‘भारत कुमार’ कहे जाने वाले मनोज कुमार की फिल्मों में देशभक्ति गीतों को अमर बनाने वाले महान गायक महेंद्र कपूर की थी।

बीआर चोपड़ा और महेंद्र कपूर की ऐतिहासिक जुगलबंदी

महेंद्र कपूर और फिल्म निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा का नाता केवल महाभारत तक सीमित नहीं था, बल्कि यह रिश्ता कई दशकों पुराना और अटूट था। बीआर चोपड़ा अपनी फिल्मों में महेंद्र कपूर की गायकी के इतने बड़े मुरीद थे कि उन्होंने ‘गुमराह’, ‘हमराज’, ‘धुंध’, ‘निकाह’ और ‘इंसाफ का तराजू’ जैसी अपनी कई कालजयी फिल्मों में मुख्य रूप से महेंद्र कपूर से ही गाने गवाए। ‘हमराज’ फिल्म के गाने “नीले गगन के तले…” के लिए महेंद्र कपूर को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।

जब 1980 के दशक के उत्तरार्ध में बीआर चोपड़ा ने भारतीय महाकाव्य ‘महाभारत’ को छोटे पर्दे पर उतारने का महात्वाकांक्षी फैसला किया, तो शीर्षक गीत के लिए उनके दिमाग में सिर्फ एक ही नाम था—महेंद्र कपूर। संगीतकार राजकमल ने जब इस महागाथा के लिए छंद, दोहे और श्लोक तैयार किए, तो उन्हें गाने के लिए एक ऐसी आवाज की जरूरत थी जिसमें भक्ति, गंभीरता, चेतावनी और ओज एक साथ मौजूद हो। महेंद्र कपूर ने इस गीत को जिस तन्मयता, स्पष्ट संस्कृतनिष्ठ उच्चारण और बुलंद आवाज में गाया, उसने उस दौर के हर दर्शक के मन में धर्म और कर्म के मर्म को जीवंत कर दिया।

‘अथ श्री महाभारत कथा’ के साथ हर प्रसंग के दोहों में भरी जान

महेंद्र कपूर ने ‘महाभारत’ के लिए केवल शीर्षक गीत ही नहीं गाया, बल्कि पूरे धारावाहिक के दौरान जब भी कोई महत्वपूर्ण प्रसंग, युद्ध, मृत्यु या नीतिगत संवाद आता था, तो पृष्ठभूमि में बजने वाले दोहों और चौपाइयों को भी अपनी आवाज दी थी। कर्ण के जन्म से लेकर भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा, द्रौपदी चीरहरण, कुरुक्षेत्र का भीषण युद्ध और गीता के उपदेश तक—हर मोड़ पर महेंद्र कपूर की आवाज दर्शकों की आंखों में आंसू और मन में सिहरन पैदा कर देती थी। धारावाहिक के कथावाचक ‘काल’ (समय) के सूत्र को महेंद्र कपूर के गाए दोहे एक संपूर्ण और आध्यात्मिक रूप प्रदान करते थे। बिना किसी आधुनिक ऑटो-ट्यून या डिजिटल इफेक्ट्स के, सिर्फ लाइव रिकॉर्डिंग और गले की स्वाभाविक खनक के दम पर उन्होंने उस गीत को हमेशा के लिए अमर बना दिया।

देशभक्ति गीतों को अपनी आवाज से कर चुके हैं अमर

धार्मिक और भक्ति गीतों के अलावा महेंद्र कपूर की सबसे बड़ी पहचान उनके गाए जोशीले देशभक्ति गीत हैं। अभिनेता मनोज कुमार की देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्मों की आत्मा महेंद्र कपूर की गायकी ही थी। 1967 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘उपकार’ का अमर गीत “मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती…”, फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ का “भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं…”, और फिल्म ‘क्रांति’ का “अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे…” जैसे गीतों ने महेंद्र कपूर को भारत के कोने-कोने में घर-घर का नाम बना दिया। आज भी राष्ट्रीय पर्वों—स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर जब ये गीत लाउडस्पीकरों पर बजते हैं, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उनकी आवाज में मिट्टी की ऐसी सौंधी महक और वतनपरस्ती का जज्बा था, जिसे सुनकर युवा पीढ़ी में आज भी जोश भर जाता है।

मोहम्मद रफी को मानते थे अपना गुरु और आदर्श

महेंद्र कपूर का जन्म 9 जनवरी 1934 को अमृतसर में हुआ था। बचपन से ही संगीत के प्रति गहरा लगाव रखने वाले महेंद्र कपूर महान गायक मोहम्मद रफी को अपना सच्चा गुरु और आदर्श मानते थे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत तालीम पंडित हुस्नलाल, पंडित भगतराम और उस्ताद अमानत अली खान से ली थी। 1957 में आयोजित ‘मेट्रो मर्फी ऑल इंडिया गायन प्रतियोगिता’ जीतकर वे बॉलीवुड की मुख्यधारा में आए, जहां संगीतकार सी. रामचंद्र ने उन्हें फिल्म ‘नवरंग’ के मशहूर गाने “आधा है चंद्रमा रात आधी…” से बड़ा ब्रेक दिया। इसके बाद उन्होंने नौशाद, कल्याणजी-आनंदजी, मदन मोहन और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे उस दौर के सभी शीर्ष संगीतकारों के साथ मिलकर अनगिनत सुपरहिट नग्मे दिए। भारत सरकार ने संगीत में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया।

आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ गए अविस्मरणीय धरोहर

27 सितंबर 2008 को भले ही यह महान फनकार इस दुनिया को अलविदा कह गया, लेकिन उनकी आवाज की ताकत आज भी जस की तस कायम है। जब भी इतिहास के पन्नों को पलटा जाता है और भारतीय टेलीविजन पर महाभारत के उस महासमर की बात होती है, तो महेंद्र कपूर की आवाज उस गाथा की आत्मा बनकर गूंजती है। ‘अथ श्री महाभारत कथा’ केवल एक टीवी शो का टाइटल ट्रैक नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पहचान और संगीत इतिहास का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय है, जो हमेशा नई पीढ़ियों को धर्म, सत्य और निष्ठा का संदेश देता रहेगा।

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