भूपेश बघेल से नहीं संभला चन्नी-वडिंग विवाद: सचिन पायलट को मिली पंजाब कांग्रेस की कमान, बघेल भेजे गए असम

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य कांग्रेस के भीतर छिड़ा अंतर्कलह और गुटबाजी चरम पर पहुंचने के बाद पार्टी आलाकमान को बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पंजाब कांग्रेस के दो कद्दावर चेहरों—पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच महीनों से जारी शक्ति प्रदर्शन और विवाद को सुलझाने में नाकाम रहने के बाद कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी के पद से हटा दिया है। पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, अब राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और तेजतर्रार नेता सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया महासचिव प्रभारी नियुक्त किया गया है। वहीं, भूपेश बघेल को अब असम का प्रभार सौंपा गया है।

क्यों खड़ा हुआ था चन्नी बनाम वडिंग विवाद?

पंजाब कांग्रेस में विवाद की मुख्य जड़ संगठन का नेतृत्व और आगामी विधानसभा चुनाव की कमान है। जब पार्टी हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा और चन्नी को केवल चुनाव प्रचार अभियान समिति (Campaign Committee) का प्रमुख बनाया, तभी से चन्नी खेमा खुलकर नाराज हो गया था।

जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं का मानना था कि दलित बाहुल्य और जमीनी समीकरणों को साधने के लिए प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव बेहद जरूरी है। चन्नी खेमे का आरोप था कि वडिंग की कार्यशैली से कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। यह खींचतान पार्टी की बैठकों से निकलकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक जा पहुंची, जहां दोनों नेताओं के समर्थक कई मौकों पर आपस में भिड़ते और नारेबाजी करते नजर आए।

बघेल पर लगे पक्षपात के आरोप, लगे ‘गो बैक’ के नारे

विवाद को सुलझाने के लिए आलाकमान ने भूपेश बघेल को बतौर संकटमोचक मैदान में उतारा था। बघेल ने दर्जनों नेताओं से रायशुमारी की, लेकिन उन्होंने आलाकमान को दी अपनी रिपोर्ट में चुनाव से ठीक पहले प्रदेश अध्यक्ष बदलने को अनुचित ठहराया। इसके बाद चन्नी खेमे ने सीधे तौर पर भूपेश बघेल पर राजा वडिंग का खुला पक्ष लेने का आरोप लगा दिया।

हालात इतने बिगड़ गए कि पंजाब दौरे के दौरान कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘बघेल गो बैक’ और ‘वडिंग गो बैक’ के पोस्टर लगाए और सफेद टी-शर्ट पहनकर सार्वजनिक विरोध दर्ज कराया। पंजाब कांग्रेस के एक बड़े धड़े ने बघेल को ‘तटस्थ’ मानने से इनकार कर दिया था। दिल्ली में राहुल गांधी और शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद आखिरकार आलाकमान ने यह मान लिया कि बघेल के रहते पंजाब का यह घमासान शांत नहीं हो सकता।

सचिन पायलट को क्यों सौंपी गई कमान?

राजस्थान में खुद लंबे समय तक सत्ता और संगठन के आंतरिक टकराव का अनुभव रखने वाले सचिन पायलट को राजनीतिक गलियारों में एक सुलझे हुए और तटस्थ रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है।

पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि:

  • गुटबाजी पर लगाम: पायलट की छवि किसी भी गुट से बंधी नहीं है, जिससे वे चन्नी, राजा वडिंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के बीच संतुलन साध सकते हैं।

  • युवा और आक्रामक नेतृत्व: पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और आक्रामक भाजपा को चुनौती देने के लिए पार्टी को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो कैडर में नई ऊर्जा भर सके।

  • संगठनात्मक अनुभव: वर्ष 2018 में राजस्थान में कांग्रेस को जीत दिलाने वाले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पायलट के पास जमीन पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का पुराना अनुभव है।

फैसले पर दोनों खेमों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

सचिन पायलट की नियुक्ति का पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने खुलकर स्वागत किया और इस अहम फैसले के लिए पार्टी आलाकमान का आभार जताया। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने भी पायलट को बधाई दी, साथ ही भूपेश बघेल को अपना ‘मार्गदर्शक’ बताते हुए उनके योगदान के लिए धन्यवाद कहा। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भी पायलट का स्वागत करते हुए संगठन को मजबूत करने की उम्मीद जताई।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि पायलट के सामने राह आसान नहीं होगी। उनकी सबसे पहली और बड़ी परीक्षा यह होगी कि क्या वे बिना प्रदेश अध्यक्ष बदले चन्नी खेमे को शांत रख पाते हैं, या फिर आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस के शीर्ष पदों पर और भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

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