
प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका ‘साइंस एडवांसेज’ (Science Advances) में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन ने वैश्विक न्यूरोलॉजी और डेंटल साइंस की दुनिया में हलचल मचा दी है। शोध के अनुसार, मसूड़ों की पुरानी और गंभीर बीमारी पैदा करने वाला एक सूक्ष्म बैक्टीरिया अल्जाइमर रोग (भूलने की बीमारी) से ग्रस्त मरीजों के मस्तिष्क के ऊतकों में सक्रिय पाया गया है। इस खुलासे के सामने आते ही यह बहस तेज हो गई है कि क्या दांतों और मसूड़ों की खराबी ही अल्जाइमर का मूल कारण है। हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि यह संबंध सीधे कारण और प्रभाव (Cause and Effect) से ज्यादा एक जटिल जैविक कड़ी को दर्शाता है।
मसूड़ों के बैक्टीरिया का दिमाग से क्या है कनेक्शन?
इस संपूर्ण शोध के केंद्र में पोर्फिरोमोनस जिंजिवैलिस (Porphyromonas gingivalis) नामक बैक्टीरिया है। यह रोगाणु मसूड़ों की क्रोनिक बीमारी ‘पीरियडोन्टाइटिस’ (पायरिया का गंभीर रूप) का मुख्य कारक होता है।
वैज्ञानिकों ने जब अल्जाइमर से जान गंवाने वाले मरीजों के पोस्ट-मॉर्टम ब्रेन टिश्यूज की जांच की, तो बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
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96% सैंपल्स में जहरीले एंजाइम: अल्जाइमर के करीब 96 प्रतिशत ब्रेन सैंपल्स में इस बैक्टीरिया द्वारा स्रावित होने वाले विषाक्त एंजाइम्स, जिन्हें जिंजिपेंस (Gingipains) कहा जाता है, की मौजूदगी दर्ज की गई।
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ब्रेन फ्लूइड में बैक्टीरिया का डीएनए: जीवित मरीजों के सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (मस्तिष्कमेरु द्रव) के नमूनों में भी इस बैक्टीरिया के डीएनए अंश मिले, जिससे यह सिद्ध हुआ कि यह बैक्टीरिया वास्तव में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) तक पहुंच बना रहा है।
मुंह का बैक्टीरिया दिमाग तक पहुंचता कैसे है?
सामान्य परिस्थितियों में इंसानी दिमाग ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ (BBB) द्वारा रक्त में मौजूद अधिकांश बाहरी विषाक्त पदार्थों से सुरक्षित रहता है। लेकिन मसूड़ों के गंभीर संक्रमण में यह सुरक्षा चक्र टूट जाता है:
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रक्तप्रवाह में प्रवेश: पीरियडोन्टाइटिस के दौरान मसूड़ों के ऊतकों में घाव बन जाते हैं और महीन रक्त वाहिकाएं फट जाती हैं। दांतों को ब्रश करते समय, फ्लॉसिंग करते समय या खाना चबाते समय यह बैक्टीरिया आसानी से खून के बहाव में दाखिल हो जाता है।
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मस्तिष्क की ओर यात्रा: रक्तप्रवाह के जरिए यह बैक्टीरिया शरीर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए मस्तिष्क तक पहुंचता है।
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न्यूरोइन्फ्लेमेशन: दिमाग में प्रवेश करने के बाद इसके जहरीले एंजाइम नसों की कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) को नुकसान पहुंचाते हैं और मस्तिष्क में सूजन (Neuroinflammation) पैदा करते हैं, जो संज्ञानात्मक गिरावट (Cognitive Decline) की रफ्तार को तेज कर देती है।
चूहों पर किए गए प्रयोग के परिणाम
शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया की पुष्टि के लिए चूहों के मॉडल पर नियंत्रित परीक्षण किया:
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चूहों के मुंह में जब पोर्फिरोमोनस जिंजिवैलिस का संक्रमण कराया गया, तो कुछ ही हफ्तों में बैक्टीरिया ने उनके दिमाग में घुसपैठ कर ली।
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दिमाग में पहुंचते ही इसने एमाइलॉयड बीटा (Amyloid Beta) नामक प्रोटीन के उत्पादन को असामान्य रूप से बढ़ा दिया। अल्जाइमर की पहचान यही प्रोटीन प्लाक या गुच्छे होते हैं, जो नसों के बीच संदेश प्रवाह को बाधित करते हैं।
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जब चूहों को जिंजिपेंस एंजाइम को ब्लॉक करने वाली प्रायोगिक दवाएं दी गईं, तो उनके मस्तिष्क में सूजन कम हुई, न्यूरॉन्स का विनाश रुका और एमाइलॉयड का जमाव भी घट गया।
क्या मसूड़ों की बीमारी ही अल्जाइमर का असली कारण है?
रिसर्च के इन निष्कर्षों से यह धारणा नहीं बननी चाहिए कि दांत साफ न रखने से सीधे तौर पर अल्जाइमर हो जाता है। वैज्ञानिकों और न्यूरोलॉजिस्ट्स ने स्पष्ट किया है कि मसूड़ों का संक्रमण अल्जाइमर का इकलौता या प्राथमिक कारण नहीं है।
अल्जाइमर एक बहु-कारकीय और बेहद जटिल न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है। इसके विकास में उम्र, आनुवंशिकी (जैसे APOE-e4 जीन), उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, जीवनशैली और दिमाग में प्रोटीन मेटाबॉलिज्म की विफलता जैसे कई कारक एक साथ भूमिका निभाते हैं। इंसानों पर किए गए कुछ प्रारंभिक नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) में इस बैक्टीरिया को लक्षित करने वाली दवाएं अल्जाइमर को पूरी तरह ठीक करने या उसकी प्रगति को पूरी तरह रोकने में निर्णायक साबित नहीं हो सकी हैं। यह बैक्टीरिया बीमारी की गंभीरता और मस्तिष्क की सूजन को बढ़ाने वाला एक बड़ा ट्रिगर तो हो सकता है, लेकिन एकमात्र स्रोत नहीं।
चिकित्सा विज्ञान के लिए इस रिसर्च के मायने
भले ही यह बैक्टीरिया अल्जाइमर की एकमात्र जड़ न हो, लेकिन इस अध्ययन ने तंत्रिका विज्ञान को एक नई दिशा दी है:
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सिस्टेमिक इन्फ्लेमेशन की भूमिका: इसने यह प्रमाणित किया है कि शरीर के किसी एक हिस्से (जैसे मुंह) का क्रोनिक संक्रमण किस तरह दूर स्थित दिमाग की कार्यप्रणाली को सीधे प्रभावित कर सकता है।
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निवारक दृष्टिकोण: दैनिक जीवन में बेहतर ओरल हाइजीन (दिन में दो बार ब्रश, फ्लॉसिंग और मसूड़ों की नियमित जांच) बनाए रखने से न केवल दांत सुरक्षित रहते हैं, बल्कि यह उम्र बढ़ने पर मस्तिष्क में अनावश्यक इन्फ्लेमेशन के भार को कम करने में भी सहायक हो सकती है।
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