दिलजीत दोसांझ की रूहानी आवाज में गूंजी ‘हनुमान चालीसा’, नितेश तिवारी की ‘रामायण’ के एंड क्रेडिट सीन ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका

भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी आस्था, अध्यात्म और आधुनिक तकनीक का मेल होता है, तो वह केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय उत्सव बन जाता है। निर्देशक नितेश तिवारी की महाकाव्य फिल्म ‘रामायण’ को लेकर पूरे देश में जिस स्तर का रोमांच और कौतूहल बना हुआ है, उसने अब एक बिल्कुल नया और अप्रत्याशित मोड़ ले लिया है। फिल्म के अंत में चलने वाले एंड क्रेडिट (End Credits) सीन को लेकर जो ताजा जानकारी और झलकियां सोशल मीडिया पर सामने आई हैं, उसने करोड़ों रामभक्तों और संगीत प्रेमियों के दिलों की धड़कनें तेज कर दी हैं। ग्लोबल म्यूजिक आइकन और संजीदा अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इस भव्य फिल्म के समापन के लिए अपनी रूहानी आवाज में ‘श्री हनुमान चालीसा’ का गायन किया है। जैसे ही थिएटर और सोशल मीडिया के गलियारों में इस बात की गूंज सुनाई दी, इंटरनेट पर मानो भावनाओं का एक विशाल ज्वार उमड़ पड़ा। लोग इस बात की कल्पना मात्र से भावविभोर हो रहे हैं कि जब रणबीर कपूर के प्रभु श्रीराम और सनी देओल के महाबली हनुमान की विजय गाथा पर्दे पर समाप्त होगी, तब दिलजीत की खनकदार और भक्ति से सराबोर आवाज में बजती चौपाइयां दर्शकों को किस अलौकिक लोक में ले जाएंगी।

रामायण के एंड क्रेडिट सीन में दिलजीत दोसांझ का चमत्कारी संगीत संगम

सिनेमाई गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, नितेश तिवारी और उनकी पूरी क्रिएटिव टीम फिल्म के अंत को किसी साधारण समापन की तरह नहीं, बल्कि एक अमर और दिव्य अनुभव के रूप में छोड़ना चाहती थी। सामान्य तौर पर फिल्मों के एंड क्रेडिट्स के दौरान दर्शक अपनी सीटों से उठकर बाहर जाने लगते हैं, लेकिन मेकर्स ने ऐसी रणनीति तैयार की है कि आखिरी नाम स्क्रीन से हटने तक एक भी दर्शक अपनी जगह से हिल न सके। इस अंतिम दृश्य में जब लंका विजय और अयोध्या वापसी की स्वर्णिम बेला का आभास होता है, तभी बैकग्राउंड में मंद-मंद शंखनाद के साथ दिलजीत दोसांझ के सुर गूंजते हैं। दिलजीत ने ‘श्रीगुरु चरन सरोज रज’ के दोहे से लेकर अंतिम चौपाई तक जिस समर्पण, ठहराव और प्रचंड ऊर्जा के साथ इस पाठ को स्वर दिया है, वह आधुनिक संगीत और सनातन परंपरा का एक अभूतपूर्व मिलन नजर आता है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि यह प्रयोग भारतीय सिनेमा में किसी मास्टरस्ट्रोक से कम नहीं है, क्योंकि यह सीधे दर्शकों के रोंगटे खड़े करने की क्षमता रखता है।

भक्ति और ऊर्जा का अलौकिक मेल: दिलजीत की आवाज का जादुई प्रभाव

दिलजीत दोसांझ अपनी ऊर्जावान गायकी के साथ-साथ अपनी गहरी आध्यात्मिक आस्था के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। चाहे गुरबानी का गायन हो या पारंपरिक भक्ति पद, दिलजीत के सुरों में एक ऐसी सादगी और गहराई होती है जो हर धर्म और वर्ग के श्रोता की आत्मा को छू लेती है। जब रामायण जैसी ऐतिहासिक गाथा के लिए उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ अपनी विशिष्ट आवाज में रिकॉर्ड किया, तो उसमें पंजाब की मिट्टी की मिठास और वैदिक मंत्रोच्चार की शक्ति दोनों एक साथ समाहित हो गईं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो रही चर्चाओं के अनुसार, इस ट्रैक में दिलजीत की आवाज धीमी गति से शुरू होकर धीरे-धीरे अपने चरम पर पहुंचती है। जैसे-जैसे ‘रामदूत अतुलित बलधामा’ और ‘महाबीर बिक्रम बजरंगी’ की पंक्तियां आती हैं, वैसे-वैसे वाद्ययंत्रों की धमक और दिलजीत के सुर मिलकर एक ऐसा आध्यात्मिक वातावरण तैयार करते हैं जो सिनेमाहॉल को किसी विशाल मंदिर परिसर में तब्दील कर देता है।

एआर रहमान और हंस जिमर का दिव्य संगीत निर्देशन

इस हनुमान चालीसा की भव्यता केवल दिलजीत की आवाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दुनिया के दो सबसे बड़े संगीत महारथियों का दिमाग काम कर रहा है। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान और हॉलीवुड के लीजेंडरी कंपोजर हंस ज़िमर की ऐतिहासिक जुगलबंदी ने इस ट्रैक को अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऑर्केस्ट्रल स्वरूप प्रदान किया है। पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों जैसे मंजीरा, ढोलक, नगाड़ा और शंख की पवित्र ध्वनियों को पश्चिमी सिंफनी और ब्रास सेक्शंस के साथ इस बारीकी से पिरोया गया है कि संगीत सुनते ही शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती है। हंस ज़िमर के भारी-भरकम ब्रास नोट्स जब लंका के विध्वंस और हनुमान जी के विशालकाय रूप को दर्शाते हैं, तब रहमान साहब की रूहानी सूफियाना धुनें प्रभु राम के प्रति पवनपुत्र की अगाध भक्ति को रेखांकित करती हैं। यह संगीत संयोजन न केवल भारतीय श्रोताओं को सम्मोहित करता है, बल्कि वैश्विक दर्शकों के सामने भी भारतीय शास्त्रीय और भक्ति संगीत की असीमित शक्ति का प्रदर्शन करता है।

सनी देओल के वीर हनुमान अवतार के साथ रूह कंपा देने वाला दृश्य

फिल्म में महाबली हनुमान का किरदार निभा रहे दिग्गज अभिनेता सनी देओल की स्क्रीन प्रेजेंस को लेकर पहले से ही भारी उत्साह था, लेकिन इस एंड क्रेडिट सीन ने उस उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जब दिलजीत की आवाज में हनुमान चालीसा बजती है, तो पर्दे पर सनी देओल के हनुमान रूप के कुछ ऐसे विहंगम और अनसीन दृश्य दिखाए जाते हैं जो मुख्य फिल्म का हिस्सा नहीं थे। इसमें संजीवनी बूटी लेकर द्रोणागिरि पर्वत के साथ आकाश मार्ग से उड़ते बजरंगबली, अशोक वाटिका में सीता माता को राम मुद्रिका सौंपते उनके भावुक नयन और प्रभु राम के चरणों में सर्वस्व न्योछावर करते उनके परम भक्त स्वरूप को बड़े पैमाने पर विजुअलाइज किया गया है। सनी देओल की रौबदार देहयष्टि, उनकी आंखों में भरा स्वामी-भक्ति का भाव और बैकग्राउंड में बजती चालीसा मिलकर एक ऐसा विजुअल ट्रीट पेश करते हैं जिसे देखकर हर दर्शक स्वतः ही नतमस्तक हो जाने को विवश हो जाता है।

सोशल मीडिया पर उठा तूफान, दर्शकों ने बताया रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव

जैसे ही इस एंड क्रेडिट सीन और दिलजीत के गाने की बात सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। अयोध्या, दिल्ली, लखनऊ, मुंबई से लेकर पंजाब और विदेशों में बैठे भारतीय दर्शकों ने एक्स पर लिखना शुरू कर दिया कि यह इस दशक का सबसे बड़ा सरप्राइज है। एक यूजर ने लिखा कि दिलजीत की आवाज में इतनी पवित्रता और जोश है कि सुनकर आंखें भर आती हैं और हाथ अपने आप जुड़ जाते हैं। वहीं एक अन्य सिनेमा प्रेमी ने टिप्पणी की कि जब थिएटर्स में यह सीन चलेगा, तो हर सिनेमाघर में तालियों और जय श्रीराम के नारों की गूंज सुनाई देगी। ट्रेड पंडितों का भी मानना है कि फिल्म के अंत में इस तरह का हाई-एनर्जी और इमोशनल भक्ति ट्रैक जोड़ना वर्ड ऑफ माउथ को कई गुना मजबूत करेगा, जिससे दर्शक बार-बार इस दिव्य अनुभव को सिनेमाघरों में महसूस करने के लिए टिकट खिड़की पर खिंचे चले आएंगे।

बॉक्स ऑफिस और भारतीय सिनेमाई इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय

नितेश तिवारी की ‘रामायण’ पहले से ही अपनी भव्य स्टारकास्ट—रणबीर कपूर (श्रीराम), साई पल्लवी (माता सीता), यश (रावण) और सनी देओल (हनुमान)—को लेकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रही है। लेकिन दिलजीत दोसांझ के इस सरप्राइज एलिमेंट ने फिल्म की सांस्कृतिक और भावनात्मक अपील को एक अभूतपूर्व ऊंचाई दे दी है। यह साबित करता है कि आधुनिक सिनेमा जब अपनी जड़ों, अपनी सनातन संस्कृति और लोकभावनाओं का सच्चा सम्मान करता है, तो वह भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे जाकर अमर बन जाता है। दिलजीत दोसांझ की यह हनुमान चालीसा केवल एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और संगीत का एक ऐतिहासिक दस्तावेज बनने जा रही है, जो दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए गूंजती रहेगी।

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