
भारतीय सिनेमा के सौ से अधिक वर्षों के इतिहास में बहुत कम ऐसे क्षण आते हैं जब भाषा, क्षेत्र और फिल्म इंडस्ट्री की तमाम दीवारें ढह जाती हैं और पूरा देश केवल एक साझा सांस्कृतिक भावना के सूत्र में बंध जाता है। निर्देशक नितेश तिवारी की बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित पौराणिक महाकाव्य फिल्म ‘रामायण’ के हालिया एक्सक्लूसिव प्रीमियर और स्पेशल स्क्रीनिंग ने सिनेमाई गलियारों में एक ऐसा ही ऐतिहासिक भूचाल ला दिया है। मुंबई से लेकर हैदराबाद और चेन्नई से लेकर दिल्ली तक, फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गजों की आंखें उस वक्त नम हो गईं जब उन्होंने पर्दे पर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन जीवन गाथा को जीवंत होते देखा। रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और सनी देओल जैसे दिग्गजों से सजी इस फिल्म को देखने के बाद जो दृश्य सामने आए, उन्होंने पूरे सोशल मीडिया और फिल्म उद्योग को झकझोर कर रख दिया है। सिनेमाहॉल से बाहर निकलते हुए मशहूर रैपर और संगीतकार बादशाह अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और मीडिया के कैमरों के सामने ही बेहद भावुक हो गए। वहीं दूसरी तरफ ‘पुष्पा’ फेम पैन-इंडिया आइकन अल्लू अर्जुन ने हाथ जोड़कर पूरे देश और दुनिया भर में बसे भारतीयों से एक ऐसी मार्मिक अपील कर दी है, जिसकी गूंज अब हर घर और सोशल मीडिया के हर कोने में सुनाई दे रही है।
थिएटर से बाहर निकलते ही छलक पड़े बादशाह के आंसू, बोले- यह फिल्म नहीं साक्षात ईश्वरीय अनुभूति है
स्क्रीनिंग खत्म होने के बाद जब अंधेरे थिएटर की बत्तियां जलीं, तो वहां मौजूद हर शख्स सन्न और निशब्द खड़ा था। बॉलीवुड के सबसे चहेते म्यूजिशियन बादशाह, जो हमेशा अपने कूल अंदाज और तेजतर्रार बीट्स के लिए जाने जाते हैं, वे उस दिन पूरी तरह बदले हुए नजर आए। सिनेमा हॉल से बाहर आते वक्त बादशाह की आंखें आंसुओं से भीगी हुई थीं और उनके चेहरे पर एक असीम भक्ति और विस्मय का भाव साफ झलक रहा था। जब पत्रकारों ने उनसे फिल्म के अनुभव के बारे में पूछा, तो कुछ क्षणों तक उनके गले से आवाज ही नहीं निकली। अपने आंसुओं को पोंछते हुए बादशाह ने रूंधे गले से कहा कि वे अपने जीवन में कभी किसी फिल्म को देखकर इस कदर भीतर तक नहीं हिले हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल मनोरंजन या भव्य विजुअल्स का तमाशा नहीं है, बल्कि यह सीधे आपकी आत्मा को झकझोर देने वाला एक रूहानी अनुभव है। बादशाह ने विशेष रूप से प्रभु राम के वन गमन, सीता हरण और लंका विजय के दृश्यों का जिक्र करते हुए कहा कि जब बैकग्राउंड में वैदिक मंत्रों के साथ संगीत बजता है और पर्दे पर मर्यादा पुरुषोत्तम की करुणा दिखाई देती है, तो आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है और आंखें अपने आप छलकने लगती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस फिल्म ने सनातन संस्कृति के उस मूल तत्व को छू लिया है जिसे हर आधुनिक युवा को अपनी रगों में महसूस करना चाहिए।
अल्लू अर्जुन की भावुक अपील: हर भारतीय अपने पूरे परिवार और बच्चों को यह महाकाव्य जरूर दिखाए
साउथ सिनेमा के मेगास्टार अल्लू अर्जुन, जिन्होंने अपनी फिल्मों से उत्तर से लेकर दक्षिण तक दर्शकों के दिलों पर राज किया है, इस स्क्रीनिंग के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित कलाकारों में से एक रहे। फिल्म देखकर बाहर निकले अल्लू अर्जुन के चेहरे पर एक अलग ही तेज और गंभीरता दिखाई दे रही थी। उन्होंने मीडिया के सामने आकर हाथ जोड़े और बेहद भावुक लहजे में पूरे देश के दर्शकों से सीधे मुखातिब हुए। अल्लू अर्जुन ने कहा कि ‘रामायण’ केवल एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह भारत की अस्मिता, हमारी जड़ों और हमारे पूर्वजों के संस्कारों का सबसे बड़ा उत्सव है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, भगवान राम हमारे रोम-रोम में बसते हैं और नितेश तिवारी ने जिस शुद्धता, गरिमा और तकनीकी भव्यता के साथ इस कहानी को पर्दे पर उतारा है, वह हम सभी भारतीयों के लिए गर्व का विषय है। अल्लू अर्जुन ने अपील करते हुए कहा कि हर माता-पिता को अपने बच्चों का हाथ पकड़कर सिनेमाघरों तक ले जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी यह देख सके कि हमारी संस्कृति का वैभव और त्याग कितना महान रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने से चूकता है, तो वह भारतीय सिनेमा के सबसे स्वर्णिम और गौरवशाली अध्याय का गवाह बनने से वंचित रह जाएगा।
रणबीर कपूर के राम रूप और यश के रावण ने बांधा समा, साई पल्लवी की सादगी ने जीता दिल
स्क्रीनिंग में मौजूद तमाम फिल्मी हस्तियों का यह एकमत से मानना था कि कास्टिंग के स्तर पर नितेश तिवारी ने जो जादुई संतुलन साधा है, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। रणबीर कपूर ने जिस संयम, सौम्यता और आंतरिक आभा के साथ भगवान श्रीराम के किरदार को निभाया है, उसने हर आलोचक की बोलती बंद कर दी है। दर्शकों का कहना है कि रणबीर की आंखों में दिखने वाली करुणा और दृढ़ता सीधे दिल को छूती है, कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि वे अभिनय कर रहे हैं बल्कि ऐसा लगता है कि वे उस मर्यादा में समा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, रॉकिंग स्टार यश ने लंकापति रावण के प्रचंड अहंकार, विद्वता और शक्ति को जिस विकराल अंदाज में पर्दे पर पेश किया है, उसने थिएटर में मौजूद हर शख्स के रोंगटे खड़े कर दिए। यश की स्क्रीन प्रेजेंस और उनकी गूंजती आवाज ने खलनायकी को एक दिव्य और भव्य स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके साथ ही माता जानकी के पावन स्वरूप में साई पल्लवी की निश्छल मुस्कान और त्याग भाव ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। दर्शकों ने माना कि बिना किसी बनावटी तामझाम के साई पल्लवी ने सीता माता की जो पवित्र छवि प्रस्तुत की है, वह युगों-युगों तक याद रखी जाएगी।
सनी देओल की हनुमान के रूप में दहाड़ और ऑस्कर विजेताओं का विस्मयकारी संगीत
इस विशेष प्रदर्शन में जिस एक क्षण ने पूरे हॉल को खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया, वह था महाबली हनुमान के रूप में सनी देओल का आगमन। जैसे ही पर्दे पर सनी देओल की विशाल देहयष्टि और उनकी वज्र जैसी आवाज में जय श्रीराम का जयघोष गूंजा, स्क्रीनिंग हॉल किसी पवित्र तीर्थ स्थल के समान गुंजायमान हो उठा। इसके साथ ही ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज कंपोजर हंस ज़िमर के बैकग्राउंड स्कोर ने हर दृश्य की भावनात्मक गहराई को सौ गुना बढ़ा दिया। लंका दहन के दृश्य हों या समुद्र पर सेतु निर्माण की अद्भुत इंजीनियरिंग, डीएनईजी (DNEG) के विश्वस्तरीय वीएफएक्स ने यह साबित कर दिया कि भारतीय तकनीक अब हॉलीवुड के किसी भी बड़े स्टूडियो से उन्नीस नहीं है। विजुअल्स इतने यथार्थवादी और भव्य हैं कि दर्शक पलक झपकाना भूल जाते हैं। संगीत और विजुअल्स की इस जुगलबंदी ने अयोध्या के वैभव और दंडकारण्य के सन्नाटे को इस तरह जीवंत किया है कि देखने वाला खुद को उसी त्रेतायुग के कालखंड में खड़ा महसूस करता है।
उत्तर से दक्षिण तक सिनेमाई एकता का महासंग्राम, बॉक्स ऑफिस पर सुनामी के संकेत
इस स्क्रीनिंग के बाद जिस तरह से बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के दिग्गज एक सुर में इस फिल्म के सम्मान में खड़े हुए हैं, उसने बॉक्स ऑफिस के जानकारों और ट्रेड पंडितों को हैरान कर दिया है। मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता के डिस्ट्रीब्यूटर्स का मानना है कि यह फिल्म रिलीज के साथ ही भारतीय बॉक्स ऑफिस के इतिहास के सारे पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर करने जा रही है। बादशाह जैसे आधुनिक पॉप आइकन का रो पड़ना और अल्लू अर्जुन जैसे मास हीरो का नतमस्तक होकर अपील करना यह दर्शाता है कि यह फिल्म किसी एक वर्ग, भाषा या राज्य तक सीमित नहीं रहने वाली है। यह एक ऐसा जनआंदोलन बनने जा रही है जो सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी भीड़ जुटाएगा। सोशल मीडिया पर भी इस स्क्रीनिंग के वीडियो और सितारों के बयानों के बाद एडवांस बुकिंग और रिलीज डेट को लेकर जबर्दस्त कौतूहल फैल चुका है, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट है कि नितेश तिवारी की ‘रामायण’ सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक अमर प्रतीक बनने जा रही है।
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