‘पहला ऐसा यादव नेता देखा जो अहीर-अहीर में भेद करता हो’, ओपी राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना; पूछा- कितनों को दिया टिकट?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातिगत समीकरणों और बयानों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पहला ऐसा यादव नेता देखा है जो अहीर-अहीर के बीच में ही भेद करता है। राजभर ने दावा किया कि पहले जहां धर्म के नाम पर समाज को बांटा गया, वहीं अब अखिलेश यादव जाति की राजनीति करते-करते खुद अपने समाज के लोगों के बीच में ही ‘दो आंख’ (भेदभाव) करने लगे हैं।

घोसी और कमरिया समाज का उठाया मुद्दा, 2017 से 2024 तक दिए गए टिकटों का मांगा हिसाब

ओम प्रकाश राजभर ने यादव समाज के दो प्रमुख वर्गों—घोसी (ग्वाला) और कमरिया का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव को सीधे कटघरे में खड़ा किया। राजभर ने कहा कि पहले लोग यही समझते थे कि सपा मुखिया पूरे यादव समाज को एक नजर से देखते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनके लिए भी अपने समाज में अपने और पराए का दायरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 85 फीसदी आबादी वाले घोसी यानी ग्वाला वर्ग को अखिलेश यादव नजरअंदाज करते हैं और सिर्फ 15 फीसदी कमरिया वर्ग को ही अपना मानते हैं। इसी बात को लेकर राजभर ने अखिलेश यादव को खुली चुनौती देते हुए सवाल पूछा कि वे जनता को बताएं कि 2017 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव तक उन्होंने कितने घोसी समाज के लोगों को टिकट दिया और कितने कमरिया वर्ग को टिकट थमाया।

‘गाय-भैंस की सेवा करने वाले अहीर भाई अब जाग चुके हैं’, 2027 चुनाव को लेकर दी चेतावनी

सपा प्रमुख पर हमला जारी रखते हुए राजभर ने लिखा कि गाय-भैंस की सेवा करने वाले अहीर भाई अब पूरी तरह जाग चुके हैं और सपा का सियासी खेल समझने लगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव अभी भी स्वप्नलोक में खोए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बदल चुकी है। राजभर ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का जिक्र करते हुए दावा किया कि 85 फीसदी वाला यही ग्वाला समाज आगामी चुनावों में सपा अध्यक्ष को 2022 से भी बुरे दौर का दर्शन कराने जा रहा है। राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और यादव वोट बैंक के संतुलन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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