
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्र मेरठ में वायु प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे पूरे जिले में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर को पार करते हुए 485 के पार दर्ज किया गया है, जिसने मेरठ को देश के सबसे प्रदूषित शहरों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। हवा में फैले इस जहरीले स्मॉग और महीन धूल कणों (PM 2.5 और PM 10) के कारण स्थानीय निवासियों का सांस लेना दुश्वार हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों और विशेष रूप से दीवाली के पर्व तक इस जानलेवा प्रदूषण से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और स्थानीय निगरानी केंद्रों से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मेरठ के प्रमुख चौराहों और आवासीय इलाकों में AQI का स्तर 450 से 485 के बीच बना हुआ है। शहर के शास्त्री नगर, जयभीम नगर, दिल्ली रोड और बेगमपुल जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सुबह से ही काली धुंध छाई हुई है। हवा की गति थमने और तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के ऊपरी धरातल पर ही जमा हो गए हैं। इस वजह से लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि 485 का AQI स्तर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी प्रतिदिन 20 से 25 सिगरेट पीने जितना हानिकारक है।
मेरठ में अचानक बढ़े इस भीषण वायु प्रदूषण के पीछे कई स्थानीय और क्षेत्रीय कारक जिम्मेदार हैं। पहली बात यह कि आसपास के कृषि क्षेत्रों में जलाई जा रही पराली का धुआं हवा के रुख के साथ मेरठ के वायुमंडल में प्रवेश कर चुका है। दूसरा, शहर में जगह-जगह चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, सड़क निर्माण कार्य और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल ने हवा को और भारी बना दिया है। इसके अतिरिक्त पुराने वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं भी इस संकट को बढ़ा रहा है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, जब तक बारिश नहीं होती या तेज हवाएं नहीं चलतीं, तब तक इस स्मॉग की परत का छटना नामुमकिन है। दीवाली के दौरान पटाखे जलने से स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
बिगड़ते हालात को देखते हुए मेरठ जिला प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-3) की पाबंदियों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत गैर-जरूरी निर्माण कार्यों, क्रशर मशीनों और हॉट मिक्स प्लांटों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। शहर की प्रमुख सड़कों पर पानी का छिड़काव और मैकेनिकल स्वीपिंग की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बिना काम के घर से बाहर न निकलने और बाहर जाने पर अनिवार्य रूप से N-95 मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने बताया कि शहर के सभी अस्पतालों में सांस के मरीजों के लिए इमरजेंसी वार्ड और नेबुलाइजर की विशेष व्यवस्था की गई है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया
