योगी मॉडल की राह पर बंगाल: शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, अब सरकार खुद खरीदेगी जमीन

पश्चिम बंगाल में लंबे समय से उद्योगों के लिए जमीन उपलब्धता को लेकर चली आ रही पेचीदगियों के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा और नीतिगत बदलाव किया है। राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश के ‘योगी मॉडल’ के साथ-साथ हरियाणा और आंध्र प्रदेश की सफल नीतियों की तर्ज पर एक नई औद्योगिक और भूमि नीति की रूपरेखा पेश की है। इस नई व्यवस्था के तहत सरकार न तो वाममोर्चे के दौर की तरह पुलिस या प्रशासन के दम पर जबरन जमीन का अधिग्रहण करेगी और न ही तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल की उस नीति पर चलेगी जिसमें सरकार जमीन के मामलों से पूरी तरह हाथ खींच लेती थी। अब राज्य सरकार खुद मध्यस्थ और फैसिलिटेटर की भूमिका निभाते हुए किसानों और जमीन मालिकों से सीधे उचित दर पर जमीन खरीदेगी और औद्योगिक घरानों को परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराएगी। इसका सीधा उद्देश्य सिंगूर और नंदीग्राम जैसे पुराने विवादों की पुनरावृत्ति को रोकना और निवेशकों का भरोसा बंगाल में फिर से बहाल करना है।

क्या है लैंड-पूलिंग सिस्टम और किसानों को कैसे मिलेगा उद्योगों में शेयर

सरकार की नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहलू ‘लैंड-पूलिंग सिस्टम’ को माना जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत जमीन मालिक स्वेच्छा से अपनी जमीन राज्य सरकार या संबंधित विकास प्राधिकरण को सौंपेंगे। इसके बाद सरकार उस पूरे इलाके में सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज जैसी मूलभूत बुनियादी संरचनाओं का विकास करेगी और विकसित भूमि का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा वापस उसी जमीन मालिक को लौटा दिया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होने के बाद जमीन के उस छोटे टुकड़े का बाजार मूल्य पहले की पूरी जमीन से कई गुना अधिक हो जाता है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने यह ऐतिहासिक प्रावधान भी जोड़ा है कि जो किसान या जमीन मालिक औद्योगिक क्लस्टर के लिए अपनी जमीन देंगे, उन्हें उस जमीन पर स्थापित होने वाली कंपनी या प्रोजेक्ट में शेयर (इक्विटी) का एक हिस्सा भी सुनिश्चित कराया जाएगा। इससे किसान केवल एकमुश्त मुआवजे तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उस उद्योग की भविष्य की कमाई और लाभांश के भी स्थायी भागीदार बनेंगे।

2013 के कानून के आधार पर मुआवजा और खाली पड़े प्लॉटों पर 3 महीने का अल्टीमेटम

भूमि अधिग्रहण के वित्तीय पहलू को स्पष्ट करते हुए अधिकारियों ने बताया कि किसानों से सीधे जमीन खरीदने के दौरान 2013 के केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून के अनुरूप मुआवजा दिया जाएगा, जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में बाजार भाव से चार गुना तक भुगतान का प्रावधान है। यदि जमीन पर कोई संरचना, मकान या पेड़ हैं, तो उसका अतिरिक्त मूल्यांकन कर अलग से भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने उन पुराने निवेशकों और कंपनियों को सख्त अल्टीमेटम दिया है, जिन्होंने वर्षों पहले रियायती दरों पर औद्योगिक प्लॉट तो ले लिए लेकिन अब तक वहां कोई काम शुरू नहीं किया। सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि ऐसे आवंटियों को 3 महीने के भीतर काम शुरू करना होगा, अन्यथा जमीन सरकार को वापस लौटानी पड़ेगी। वापस ली गई जमीन की मूल राशि सरकार लौटा देगी और उस भूमि को ऐसे नए निवेशकों को सौंपा जाएगा जो तुरंत फैक्ट्री लगाने और रोजगार पैदा करने के लिए तैयार हैं।

‘भय आउट, भरोसा इन’ का नारा; जबरन वसूली और सिंडिकेट राज पर जीरो टॉलरेंस

नई औद्योगिक संवर्धन नीति को पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में व्यापारिक माहौल को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि बंगाल को पटरी पर लाने के लिए सरकार का सीधा मंत्र ‘भय आउट, भरोसा इन’ रहेगा। राज्य में औद्योगिक निवेश को बाधित करने वाले कट-मनी, सिंडिकेट कल्चर और जबरन चंदा वसूली पर पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि किसी भी स्तर पर उद्यमियों को प्रताड़ित करने या अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही राज्य के लगभग चार लाख किसानों को कृषि कार्यों के लिए बिजली पर विशेष सब्सिडी देने की भी घोषणा की गई, ताकि औद्योगीकरण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अन्नदाताओं के हितों का भी संतुलन बना रहे।

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