
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के नागरिकों के हित में और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाले प्रभावित परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और मानवीय निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भारी बारिश, बिजली गिरने, आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और अनपेक्षित दैवीय आपदाओं के कारण जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि (मुआवजा) को सीधे दोगुना करने का ऐलान किया है। सीएम योगी के इस बड़े फैसले के बाद अब आपदा में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये के बजाय 8 लाख रुपये की भारी-भरकम सहायता राशि प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस फैसले से पूरे राज्य में आपदा पीड़ितों को समय पर और पर्याप्त आर्थिक राहत मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सरकार के इस कदम की चौतरफा सराहना की जा रही है और इसे राज्य में आपदा प्रबंधन व जन-कल्याणकारी नीतियों के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जनहानि होने पर पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह सहायता (Ex-gratia Amount) में यह वृद्धि तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि दैवीय आपदा के मामलों में प्रशासनिक लालफीताशाही और देरी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पहले जहां किसी नागरिक की अकाल मृत्यु पर परिवार को आपदा राहत कोष से 4 लाख रुपये की राशि दी जाती थी, वहीं अब इस राशि को बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि जब किसी परिवार का कमाऊ सदस्य या कोई अपना असमय प्राकृतिक आपदा का शिकार बनता है, तो उस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे समय में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती और संवेदनशीलता के साथ खड़ी रहे ताकि उन्हें आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
इस फैसले के तहत केवल जानमाल के नुकसान पर ही मुआवजा नहीं बढ़ाया गया है, बल्कि आंशिक रूप से घायल होने वालों, मकान ढहने और पशुधन की हानि पर भी सहायता राशि के नियमों को और अधिक व्यावहारिक व त्वरित बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में मानसून और ग्रीष्मकाल के दौरान बिजली गिरने (Lightning), ओलावृष्टि (Hailstorm) और नदियों के उफान के कारण हर साल कई ग्रामीण और शहरी परिवार प्रभावित होते हैं। नए नियमों के मुताबिक:
-
मुआवजा राशि का सीधा ट्रांसफर: अब आपदा राहत की पूरी राशि direct benefit transfer (DBT) के जरिए सीधे पीड़ित के बैंक खाते में 24 से 48 घंटे के भीतर भेजी जाएगी।
-
अधिकारियों की जवाबदेही तय: जिलाधिकारियों (DM) और तहसील स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर सर्वे का काम पूरा करें।
-
पशुधन और फसल क्षति पर राहत: आकाशीय बिजली या बाढ़ में दुधारू पशुओं की मौत पर दी जाने वाली राहत राशि में भी इजाफा किया गया है ताकि किसानों और पशुपालकों की आजीविका प्रभावित न हो।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का यह फैसला राज्य के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों, तराई क्षेत्रों और किसान परिवारों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर उभरा है। पूर्व में प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत राशि मिलने में महीनों का समय लग जाता था, लेकिन योगी सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बना दिया है। राज्य के राहत आयुक्त (Relief Commissioner) कार्यालय को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने और जिला स्तर पर राहत कोष की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम योगी का यह कदम न केवल राज्य के आपदा प्रबंधन नेटवर्क को मजबूत करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सरकार राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक के दुख-दर्द को बांटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रदेश भर के किसानों, मजदूरों और आम जनता ने राहत की सांस ली है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया
