
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित सभागार में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय राज्यस्तरीय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस बल में चयनित 4543 नवनियुक्त उप-निरीक्षकों (नागरिक पुलिस/प्लाटून कमांडर) को औपचारिक नियुक्ति पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), प्रमुख सचिव गृह और पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों सहित प्रदेश भर से आए नवनियुक्त दारोगा और उनके भावुक परिजन उपस्थित रहे। खाकी वर्दी की नई खेप को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस सेवा केवल एक साधारण नौकरी या आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सुरक्षा, न्याय और सम्मान की गारंटी देने वाला सबसे पवित्र और जिम्मेदार संवैधानिक कर्तव्य है। अपने हाथों में नियुक्ति पत्र पाते ही युवा उप-निरीक्षकों के चेहरों पर जहां गौरव और उत्साह का भाव साफ झलक रहा था, वहीं मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी जिम्मेदारी की गंभीरता का अहसास कराते हुए निष्पक्षता, संवेदनशीलता और सत्यनिष्ठा की राह पर चलने का स्पष्ट आह्वान किया।
‘लॉ-फुल यूपी बनाना है, लॉ-लेस नहीं’ – अपराधियों और अराजक तत्वों को मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश
मंच से अपने चिरपरिचित तेवर में गरजते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून-व्यवस्था की भावी दिशा तय करते हुए कहा कि हमारी सरकार का संकल्प बहुत स्पष्ट है—हमें उत्तर प्रदेश को ‘लॉ-फुल’ यानी कानून के शासन वाला राज्य बनाना है, न कि ‘लॉ-लेस’ यानी अराजकता और जंगलराज का अड्डा। उन्होंने कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं हो सकता, चाहे वह कितना भी रसूखदार, धनवान या राजनीतिक पहुंच वाला व्यक्ति क्यों न हो। सीएम योगी ने नवनियुक्त दारोगाओं को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि जब आप थानों की कमान संभालें, तो आपकी कलम और आपकी लाठी हमेशा न्याय और संविधान के पक्ष में चलनी चाहिए। प्रदेश में किसी भी सूरत में संगठित अपराध, पेशेवर माफिया, गुंडागर्दी और अराजक तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं है। पुलिस की मौजूदगी का असर ऐसा होना चाहिए कि एक आम और निर्दोष नागरिक अपने घर से आधी रात को भी पूरे विश्वास और सुरक्षा के भाव के साथ बाहर निकल सके, जबकि कानून तोड़ने वाले असामाजिक तत्वों की रूह पुलिस का नाम सुनते ही कांप उठे।
2017 से पहले बनाम आज का उत्तर प्रदेश: दंगों से मुक्त होकर बना सुरक्षित निवेश का हब
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में आए युगांतकारी परिवर्तनों का सिलसिलेवार ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान अराजकता, आए दिन होने वाले साम्प्रदायिक दंगों, संगठित माफियाओं के आतंक, अपहरण उद्योग और महिलाओं की असुरक्षा से जुड़ी हुई थी। पर्व-त्योहारों से पहले लोग भय के साए में जीने को मजबूर थे और व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर पलायन करने लगे थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ के तहत उठाए गए कड़े कदमों ने प्रदेश की पूरी छवि को बदल कर रख दिया है। आज यूपी पूरी तरह दंगा-मुक्त हो चुका है; कांवड़ यात्रा हो, मुहर्रम हो या कोई अन्य प्रमुख धार्मिक उत्सव, सभी पर्व शांति और उल्लास के साथ संपन्न होते हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब राज्य में कानून का राज स्थापित हुआ, तभी देश-दुनिया के बड़े उद्योगपति उत्तर प्रदेश में लाखों करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए आगे आए, जिससे युवाओं के लिए रोजगार और विकास के नए रास्ते खुले हैं।
महिलाओं की सुरक्षा और थानों में पारदर्शी व्यवहार पर विशेष जोर
महिला सुरक्षा को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त उप-निरीक्षकों को निर्देश दिया कि थानों में आने वाली हर महिला, बेटी, बुजुर्ग और कमजोर वर्ग के फरियादी की बात को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। उन्होंने कहा कि ‘मिशन शक्ति’ के तहत थानों में स्थापित महिला हेल्पडेस्क और एंटी-रोमियो स्क्वॉड को और अधिक प्रभावी बनाना होगा। थानों का वातावरण ऐसा होना चाहिए कि किसी भी गरीब या असहाय व्यक्ति को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी बिचौलिए या सिफारिश की जरूरत न पड़े। सीएम योगी ने कहा कि यदि किसी थाने में पीड़ित को न्याय मिलने में देरी होती है या उसके साथ दुर्व्यवहार की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी विशेष संतोष जताया कि आज पुलिस भर्ती में बेटियों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, जिससे फील्ड में महिला सुरक्षा और संवेदनशीलता का स्तर पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।
बिना भेदभाव और पूरी शुचिता के साथ पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का नया कीर्तिमान
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की कार्यप्रणाली की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि अब प्रदेश में भर्तियां केवल और केवल योग्यता, मेरिट और प्रतिभा के आधार पर हो रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय ऐसा था जब भर्तियों में क्षेत्रवाद, जातिवाद, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार का बोलबाला था, जिसके चलते योग्य और गरीब युवाओं का हक छीन लिया जाता था और नियुक्तियां वर्षों तक न्यायालयों में फंसी रहती थीं। मौजूदा सरकार ने पूरी परीक्षा प्रणाली को डिजिटल, तकनीक-सक्षम और पारदर्शी बनाकर लाखों युवाओं को बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के खाकी वर्दी पहनने का अवसर दिया है। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त दारोगाओं से कहा कि जिस ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ आप इस मुकाम तक पहुंचे हैं, उसी ईमानदारी और निष्ठा के साथ आपको जीवन भर अपने सेवाकाल के प्रत्येक दिन का निर्वहन करना होगा।
आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक साइंस और साइबर सुरक्षा से लैस हो रही यूपी पुलिस
अपने भाषण के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने पुलिस बल के आधुनिकीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलते दौर के साथ अपराध के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं और अपराधी डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में पुलिस बल को पारंपरिक जांच पद्धतियों से आगे निकलकर साइबर लैब, डिजिटल इंटेलिजेंस, सर्विलांस सिस्टम और अत्याधुनिक फॉरेंसिक साइंस की तकनीकों में पारंगत होना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने राजधानी में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज की स्थापना की है, ताकि हर जिले और थाने स्तर तक साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक विवेचना को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री ने युवा अधिकारियों को तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करने और विवेचना में किसी भी प्रकार की मानवीय त्रुटि से बचने की सलाह दी। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी 4543 नवनियुक्त दारोगाओं और उनके गौरवान्वित परिजनों को हार्दिक बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वे कर्तव्य पथ पर अडिग रहकर उत्तर प्रदेश को देश का सबसे सुरक्षित, समृद्ध और भयमुक्त राज्य बनाने में अपना ऐतिहासिक योगदान देंगे।
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