पराग्वे में जब एक बैंक के चलते गिर गई पूरी सरकार: 4 दिनों के भीतर राष्ट्रपति को छोड़नी पड़ी थी कुर्सी

लातिन अमेरिकी देश पराग्वे के राजनीतिक इतिहास में एक बैंक विवाद के कारण सरकार गिरने और राष्ट्रपति के 4 दिन के भीतर बेदखल होने की यह घटना मई 1954 की है। यह कोई सामान्य राजनीतिक गतिरोध नहीं था, बल्कि देश के नवनिर्मित सेंट्रल बैंक ऑफ पराग्वे (Banco Central del Paraguay – BCP) पर नियंत्रण, विदेशी मुद्रा के आवंटन और वित्तीय नीतियों को लेकर सत्तारूढ़ कोलोराडो पार्टी के भीतर छिड़ा एक खुला गृहयुद्ध था। इस आर्थिक खींचतान ने महज 96 घंटे (4 मई से 8 मई 1954) के भीतर तत्कालीन राष्ट्रपति फेडेरिको शावेस (Federico Chaves) की कुर्सी छीन ली और इसके साथ ही जनरल अल्फ्रेडो स्त्रोएसनर (Alfredo Stroessner) के उस 35 साल लंबे क्रूर तानाशाही दौर की नींव रखी, जिसने पूरे पराग्वे का भविष्य बदलकर रख दिया।

विवाद की जड़: सेंट्रल बैंक, विदेशी मुद्रा आवंटन और पार्टी के भीतर दो फाड़

साल 1952 में पराग्वे ने अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था और बेलगाम महंगाई पर काबू पाने के लिए नए सिरे से केंद्रीय बैंक (BCP) का गठन किया था। उस समय देश में विदेशी मुद्रा (डॉलर) की भारी किल्लत थी और आयात-निर्यात से लेकर बड़े व्यापारिक सौदों तक सब कुछ इसी बात पर निर्भर करता था कि सेंट्रल बैंक किसे रियायती दर पर विदेशी मुद्रा जारी करता है।

इस व्यवस्था ने सेंट्रल बैंक को पराग्वे की राजनीति का सबसे शक्तिशाली और मलाईदार केंद्र बना दिया:

  • वित्तीय गुटबाजी: सेंट्रल बैंक के अध्यक्ष रॉबर्टो पेटिट (Roberto L. Petit) थे, जो कोलोराडो पार्टी के युवा और आक्रामक ‘डेमोक्रेटिक’ गुट के शीर्ष नेता थे। उनके साथ पूर्व बैंक प्रमुख और प्रभावशाली नेता एपिफानियो मेंडेस फ्लेइटास का मजबूत खेमा खड़ा था।

  • राष्ट्रपति का डर: राष्ट्रपति फेडेरिको शावेस और उनके वफादार गुट को लगने लगा कि सेंट्रल बैंक की तिजोरी और नीतियों का इस्तेमाल उनकी सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर करने और विरोधी गुट को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।

  • आर्थिक आरोप-प्रत्यारोप: सरकार में बैठे लोगों ने सेंट्रल बैंक पर वित्तीय अनियमितताओं, विदेशी मुद्रा की बंदरबांट और समानांतर सत्ता चलाने के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद राष्ट्रपति शावेस ने बैंक प्रबंधन को सीधे अपने नियंत्रण में लेने की योजना बनाई।

वे 4 दिन: 4 मई से 8 मई 1954 का खूनी ड्रामा

पहला दिन (4 मई 1954): राष्ट्रपति का एक्शन और बगावत की शुरुआत

सेंट्रल बैंक के बढ़ते प्रभाव को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति फेडेरिको शावेस ने अपने वफादार पुलिस प्रमुख और कैवलरी (अश्वारोही सेना) की मदद से विरोधी गुट के नेताओं और सेंट्रल बैंक के शीर्ष अधिकारियों की घेराबंदी करने का आदेश दिया। राष्ट्रपति ने सेंट्रल बैंक के अध्यक्ष रॉबर्टो पेटिट को पद से हटाने और कुछ संदिग्ध सहयोगियों को गिरफ्तार करने का फरमान जारी कर दिया। लेकिन सेना के कमांडर-इन-चीफ जनरल अल्फ्रेडो स्त्रोएसनर ने इसे सरकार की मनमानी बताते हुए तुरंत दखल दे दिया और सेना को अलर्ट पर डाल दिया।

दूसरा दिन (5 मई 1954): राजधानी में गोलीबारी और सेंट्रल बैंक चीफ की मौत

राजधानी असुनसियोन (Asunción) की सड़कों पर पुलिस और सेना के विद्रोही दस्ते आमने-सामने आ गए। सबसे भीषण टकराव राष्ट्रीय पुलिस मुख्यालय के भीतर हुआ। इस गोलीबारी के दौरान सेंट्रल बैंक ऑफ पराग्वे के युवा अध्यक्ष रॉबर्टो पेटिट खुद मौके पर मौजूद थे, जहां उन्हें गोली लग गई और गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई। सेंट्रल बैंक के चीफ की हत्या की खबर फैलते ही पूरे देश में सनसनी फैल गई और सेना के भीतर राष्ट्रपति शावेस के खिलाफ खुला विद्रोह भड़क उठा।

तीसरा दिन (6-7 मई 1954): राष्ट्रपति भवन की नाकेबंदी

रॉबर्टो पेटिट की मौत के बाद सेना प्रमुख जनरल अल्फ्रेडो स्त्रोएसनर ने पूरी कमान अपने हाथों में ले ली। सेना के टैंकों और हथियारों से लैस सैनिकों ने राजधानी के सभी सरकारी दफ्तरों, रेडियो स्टेशनों, सेंट्रल बैंक और राष्ट्रपति भवन (पैलासियो डे लॉस लोपेज) को चारों तरफ से घेर लिया। राष्ट्रपति शावेस के समर्थक सैन्य अधिकारी पीछे हट चुके थे और पुलिस बल ने भी घुटने टेक दिए थे। राष्ट्रपति पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुके थे।

चौथा दिन (8 मई 1954): मजबूरन इस्तीफा और सत्ता का अंत

चार दिनों तक चले भीषण सैन्य और राजनीतिक दबाव के बाद 8 मई 1954 को राष्ट्रपति फेडेरिको शावेस ने औपचारिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही कोलोराडो पार्टी के भीतर सेंट्रल बैंक को लेकर शुरू हुआ यह संघर्ष समाप्त हुआ, लेकिन देश एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

4 दिन के ड्रामे का ऐतिहासिक परिणाम: 35 साल की तानाशाही

राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद टॉमस रोमेरो परेरा को कुछ हफ्तों के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। लेकिन असली सत्ता सेना प्रमुख जनरल अल्फ्रेडो स्त्रोएसनर के हाथों में आ चुकी थी। अगस्त 1954 में एकमात्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव कराकर स्त्रोएसनर आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति बने और इसके बाद उन्होंने 1989 तक लगातार 35 वर्षों तक पराग्वे पर एकछत्र तानाशाही शासन किया।

पराग्वे के इतिहास में यह घटना इस बात की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है कि कैसे एक वित्तीय संस्थान और केंद्रीय बैंक पर कब्जे की राजनीतिक जंग ने महज 4 दिनों में एक चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका था।

Check Also

मिडटर्म में करारी हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा फेरबदल: सूजी वाइल्स की हुई छुट्टी, कट्टर वफादार स्टीफन मिलर को सौंपी व्हाइट हाउस की कमान

अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को लगे तगड़े झटके और कांग्रेस के दोनों …