पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट से ‘गायब’ हुए चुनाव अधिकारी ही, सुप्रीम कोर्ट बोला इस बार मतदान मुश्किल, पर हक रहेगा बरकरार

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच मतदाता सूची को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राज्य में जिन अधिकारियों के कंधों पर चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी है, उनमें से कई अधिकारियों के नाम ही वोटर लिस्ट से कट गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल दखल देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रभावित लोग इस बार शायद वोट न डाल पाएं, लेकिन वे अपनी पहचान बहाल कराने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रख सकते हैं।

जब रक्षक ही नहीं बन पाए मतदाता: 65 अधिकारियों का नाम कटा

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के दौरान लगभग 27 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें चुनाव ड्यूटी पर तैनात 65 अधिकारी भी शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने दलील दी कि इन अधिकारियों के ड्यूटी ऑर्डर पर उनके वोटर आईडी (EPIC) नंबर दर्ज हैं, लेकिन सूची से उन्हें मनमाने ढंग से गायब कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग लोकतंत्र का पर्व मना रहे हैं, वे खुद वोट देने से कैसे वंचित रह सकते हैं?

सुप्रीम कोर्ट का रुख: “अपीलीय न्यायाधिकरण जाएं याचिकाकर्ता”

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं को सीधे राहत देने के बजाय उन्हें निर्धारित अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) जाने का निर्देश दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह सच है कि शायद वे इस मौजूदा चुनाव में वोट न दे सकें, लेकिन मतदाता सूची में बने रहने का जो अधिक मूल्यवान अधिकार है, उसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए।” अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण ही इन शिकायतों की बारीकी से जांच करेगा।

क्यों कटे 27 लाख नाम? न्यायिक अधिकारियों ने की थी जांच

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच ‘अविश्वास’ की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की जिम्मेदारी 900 न्यायिक अधिकारियों (जजों) को सौंपी थी। 16 अप्रैल तक इन अधिकारियों ने 60 लाख आपत्तियों का निपटारा किया, जिसमें से 27 लाख नामों को हटाया गया। हालांकि, इन फैसलों के खिलाफ अब तक लाखों अपीलें दायर की गई हैं, जिनमें से केवल 136 का ही निपटारा हो सका है।

ऐतिहासिक वोटिंग और शांतिपूर्ण चुनाव पर CJI ने जताई खुशी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पहले चरण (23 अप्रैल) में हुई 91.78% रिकॉर्ड वोटिंग का स्वागत किया। CJI सूर्यकांत ने कहा, “एक नागरिक के तौर पर मैं भारी मतदान देखकर बहुत खुश हूं, इससे लोकतंत्र मजबूत होता है।” कोर्ट ने इस बात पर भी संतोष जताया कि राज्य में पहले चरण के दौरान कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इसे एक ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण चुनाव करार दिया।

अब आगे क्या?

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। जिन लोगों के नाम कट गए हैं, उन्हें हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या अपीलीय ट्रिब्यूनल से संपर्क करने की छूट दी गई है। हालांकि, समय की कमी को देखते हुए अधिकांश लोगों के लिए इस चुनाव में वोट डाल पाना नामुमकिन नजर आ रहा है। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया है कि वे मामलों की गंभीरता देखते हुए सुनवाई में तेजी लाएं ताकि भविष्य के चुनावों के लिए सूची दुरुस्त हो सके।

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