यूक्रेन में शांति नहीं, अब और बढ़ेगा तनाव! पुतिन के अगले कदम पर आई चौंकाने वाली वैश्विक रिपोर्ट, ट्रंप की कोशिशों को झटका

रूस और यूक्रेन के बीच पिछले कई सालों से जारी विनाशकारी युद्ध के खत्म होने की उम्मीदों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां दोनों देशों के बीच जल्द से जल्द शांति समझौता कराने की पुरजोर कोशिशों में जुटे हैं, वहीं क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आ रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शांति समझौते में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, बल्कि वे युद्ध को एक नया और अधिक आक्रामक रूप देकर इसे लंबे समय तक खींचने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से भड़के राष्ट्रपति पुतिन

अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की एक ताजा और सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन द्वारा हाल के दिनों में रूस के अंदरूनी हिस्सों, तेल रिफाइनरियों, प्रमुख बंदरगाहों और ईंधन के बुनियादी ढांचों पर किए गए ताबड़तोड़ ड्रोन हमलों के बाद राष्ट्रपति पुतिन का रुख और ज्यादा कड़ा हो गया है। इन हमलों ने पुतिन की इस धारणा को और मजबूत कर दिया है कि यूक्रेन और पश्चिमी देश रूस को घुटनों पर लाना चाहते हैं, इसलिए जब तक रूस अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को पूरा नहीं कर लेता, तब तक यह अभियान रुकने वाला नहीं है। क्रेमलिन के दो विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच टकराव और भयंकर रूप ले सकता है।

ट्रंप की शांति की उम्मीदों के उलट क्रेमलिन की जमीनी हकीकत

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि युद्ध उनकी उम्मीद से कहीं पहले खत्म हो सकता है। हाल ही में पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से फोन पर अलग-अलग बात करने के बाद ट्रंप ने कहा था कि दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब हैं। इसके बाद नाटो (NATO) समिट के दौरान भी जेलेंस्की के साथ शांति प्रयासों पर लंबी चर्चा हुई थी।

लेकिन पुतिन के करीबी सलाहकारों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट बिल्कुल अलग तस्वीर बयां कर रही है। पुतिन से नियमित संपर्क में रहने वाले एक सूत्र ने बताया कि रूसी राष्ट्रपति अपनी शर्तों पर पूरी तरह अड़े हुए हैं और उनका पूरा फोकस डोनबास क्षेत्र के शेष यूक्रेनी नियंत्रण वाले हिस्सों पर पूरी तरह कब्जा करने पर टिका है। पुतिन ने अपने ही उन सलाहकारों के शांति प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया है, जिन्होंने मौजूदा फ्रंटलाइन (लड़ाई की अग्रिम रेखा) पर ही युद्ध को रोकने (सीजफायर) की सिफारिश की थी। पुतिन का साफ मानना है कि रूसी सेना, भले ही धीरे-धीरे, लेकिन पूरे डोनबास को अपने नियंत्रण में लेकर रहेगी।

‘कूटनीति नहीं, नए सैन्य अभियानों की तैयारी में है रूस’

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रूस का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि रूस शांतिपूर्ण समाधान तो चाहता है, लेकिन वह केवल अपनी शर्तों पर ही होगा, क्योंकि हमारे पास ‘विशेष सैन्य अभियान’ को जारी रखने की पूरी और असीमित सैन्य क्षमता मौजूद है।

दूसरी ओर, कीव (यूक्रेन) को मॉस्को की तरफ से बातचीत का कोई भी सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहा है। यूक्रेन के एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने बताया कि हालिया सैटेलाइट और खुफिया इनपुट से पता चलता है कि रूस कूटनीतिक सफलता के बजाय एक नए और बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। यूक्रेन को यह भी आशंका है कि यदि यह लड़ाई आगे बढ़ी, तो पुतिन अन्य यूरोपीय देशों की सीमाओं को भी निशाना बना सकते हैं।

धीमी रफ्तार और आंतरिक सर्वेक्षणों के बाद भी पुतिन को चाहिए ‘जीत’

इतने वर्षों की भीषण जंग के बाद भी रूस अभी तक पूरे डोनबास पर पूर्ण नियंत्रण नहीं पा सका है, जो कि क्रेमलिन का मुख्य युद्ध लक्ष्य था। पूर्वी यूक्रेन के रणनीतिक शहर कोस्टियंटिनिव्का के आसपास रूसी सैनिकों को यूक्रेनी सेना से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिससे इस साल रूस की सैन्य बढ़त काफी धीमी रही है। युद्ध का आर्थिक और मानवीय बोझ दोनों देशों पर भारी पड़ रहा है। यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के कारण रूस के कई शहरों में ईंधन संकट गहरा गया है।

हालांकि रूस में पुतिन की लोकप्रियता अभी भी शीर्ष पर बनी हुई है, लेकिन हालिया आंतरिक सर्वेक्षणों के अनुसार, 2022 के आक्रमण के बाद से उनका जनसमर्थन अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। पश्चिमी देश इसे यूक्रेन की बड़ी सफलता मान रहे हैं और रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन क्रेमलिन के अधिकारियों का कहना है कि इन प्रतिबंधों और हमलों का पुतिन पर उल्टा असर हुआ है और उन्होंने और अधिक आक्रामक तरीके से पलटवार करने का अंतिम फैसला ले लिया है, क्योंकि पुतिन को हर हाल में अपनी राजनीतिक साख के लिए इस युद्ध में ‘जीत’ की जरूरत है।

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