जिस Gen-Z ने बनाया था ‘स्टार’, अब वही सड़कों पर: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ फूटा युवाओं का गुस्सा

नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। साल 2025 के ऐतिहासिक ‘जेन-जी’ (Gen-Z) आंदोलन की बदौलत पारंपरिक दलों को उखाड़ फेंक सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) अब खुद उसी युवा पीढ़ी के निशाने पर हैं। काठमांडू के सिंहदरबार सचिवालय के सामने मैतीघर मंडला में सैकड़ों युवाओं और भूमिहीन झुग्गीवासियों ने बालेन सरकार के एक फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था के गरीबों को उजाड़ रही है।

बिना पुनर्वास झुग्गियां हटाने पर भड़का गुस्सा, ‘संयुक्त राष्ट्रीय भूमिहीन मोर्चा’ का प्रदर्शन

यह ताजा विवाद सरकार द्वारा भूमिहीन झुग्गीवासियों को जबरन बेदखल करने के फैसले के बाद शुरू हुआ। संयुक्त राष्ट्रीय भूमिहीन मोर्चा के बैनर तले सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर “गरीबों पर अत्याचार बंद करो”, “मानवाधिकारों का सम्मान करो” और “भूमिहीन झुग्गीवासियों को आश्रय दो” जैसे तीखे नारे लगाए। दरअसल, अप्रैल महीने में सरकार ने काठमांडू घाटी सहित देश के कई हिस्सों से अतिक्रमण हटाकर 2,600 परिवारों के 15,000 से अधिक लोगों को बेदखल कर दिया था। इनमें से कई परिवार सरकार के अस्थायी केंद्रों में रह रहे थे, जिन्हें 6 जुलाई तक खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया था।

कीर्तिपुर में बाढ़ के बाद बवाल, युवा कार्यकर्ताओं पर पुलिस का लाठीचार्ज

मामला तब और बिगड़ गया जब शुक्रवार रात कीर्तिपुर स्थित एक अस्थायी सरकारी आवास केंद्र में बाढ़ का पानी भर गया, जहां करीब 150 भूमिहीन रह रहे थे। शनिवार को जब ‘जेन-जी’ से जुड़े युवा कार्यकर्ता जमीनी हकीकत जानने वहां पहुंचे, तो पुलिस ने उन पर बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया और कईयों को गिरफ्तार कर लिया। इस झड़प में एक कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुआ है। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने इस पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए गिरफ्तार युवाओं को तुरंत रिहा करने की मांग की है। वहीं, कोशी प्रांत के मोरांग में भी पुलिस दुर्व्यवहार के खिलाफ धरना दे रहे 26 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।

2025 के ऐतिहासिक आंदोलन से पीएम बने थे बालेन शाह, अब कुर्सी पर संकट

बता दें कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ 2025 में नेपाल में भीषण जेन-जी आंदोलन हुआ था, जिसके कारण तत्कालीन पीएम के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद मार्च 2026 के आम चुनावों में भ्रष्टाचार विरोधी छवि के कारण काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह को बंपर जीत मिली और उन्होंने 27 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन सत्ता संभालने के कुछ महीनों के भीतर ही गरीब विरोधी नीतियों और युवाओं पर पुलिसिया दमन के आरोपों के कारण बालेन शाह की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से गिरा है और अब जनता उनसे इस्तीफे की मांग कर रही है।

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