राम मंदिर दान चोरी विवाद: क्या चंपत राय पर भी कसेगा SIT का शिकंजा? संतोष दुबे से लंबी पूछताछ, आज सौंपेंगे दस्तावेजी साक्ष्य

अयोध्या : अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और दान में हुई कथित हेराफेरी व चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की हलचल तेज हो गई है। रविवार को एसआईटी ने इस मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ लगातार मोर्चा खोलने वाले हिंदू धर्मसेना प्रमुख और पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष दुबे से बेहद लंबी और गहन पूछताछ की। इस पूछताछ के बाद अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों पर भी जांच का शिकंजा कस सकता है।

वर्चुअल हुई पूछताछ, सिलसिलेवार दर्ज हुआ बयान

पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर (CO City) कार्यालय में एसआईटी की सदस्य किरण एस ने संतोष दुबे से वर्चुअली जुड़कर करीब आधे घंटे तक सिलसिलेवार तरीके से सवाल-जवाब किए।

  • 2002 से अब तक का ब्योरा: पूछताछ के दौरान संतोष दुबे ने मंदिर परिसर से गायब हुई रकम और कीमती सामानों का पूरा विवरण एसआईटी के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि साल 2002 में 1,250 राम शिलाओं की चोरी से लेकर हाल के वर्षों में हुए दान के मामलों तक में भारी गड़बड़ी की गई है।

  • जमीन सौदों पर गंभीर आरोप: संतोष दुबे ने केवल चढ़ावा चोरी ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट द्वारा कम कीमत की जमीनों को दोगुने से भी अधिक दामों पर खरीदने (जमीन घोटाला) के भी आरोप लगाए हैं।

‘छोटे कर्मचारियों को बनाया गया मोहरा, बड़े जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई’

बयान दर्ज कराने के बाद मीडिया से बातचीत में संतोष दुबे ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

“राम मंदिर में चोरी का यह खेल बहुत लंबे समय से चल रहा था। लेकिन असल दोषियों और इसे नजरअंदाज करने वाले रसूखदार लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय, छोटे स्तर के कर्मचारियों को मोहरा बनाकर आगे कर दिया गया। मेरी मांग है कि इस पूरे खेल के मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अपराधियों को दंड मिलना चाहिए, चाहे वह मेरा कोई सगा-संबंधी ही क्यों न हो। अयोध्यावासियों के माथे से यह कलंक मिटना बेहद जरूरी है।”

आज लखनऊ भेजे जाएंगे दस्तावेजी सबूत

एसआईटी ने संतोष दुबे से उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोपों के पक्ष में पुख्ता सबूत मांगे हैं। दुबे ने स्पष्ट किया है कि उनके पास जमीन सौदों और दान की विसंगतियों से जुड़े सभी रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हैं। वे सोमवार (13 जुलाई 2026) को इन सभी दस्तावेजी साक्ष्यों को लखनऊ स्थित एसआईटी मुख्यालय भेज देंगे। उन्होंने यह भी चुनौती दी कि यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोप झूठे साबित होते हैं, तो वे खुद हर तरह का दंड भुगतने के लिए तैयार हैं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसआईटी को मिलने वाले इन साक्ष्यों के बाद आने वाले दिनों में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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