उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को रफ्तार देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (NE-6) का नेवरना पड़री में फीता काटकर भव्य उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। उद्घाटन के बाद सभी नेताओं ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता परखने के लिए सरोजनीनगर स्थित कैप्टन मनोज पाण्डेय सैनिक स्कूल तक 51 किलोमीटर का सफर तय किया। इस 6-लेन एक्सप्रेसवे के चालू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा का समय 3 घंटे से घटकर मात्र 40 मिनट रह जाएगा।
₹4,850 करोड़ की 3 हाइवे परियोजनाओं की सौगात
उन्नाव में आयोजित इस भव्य समारोह में नेताओं ने कुल 4,850 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया:
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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे (NE-6): 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बना 63 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सप्रेसवे।
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हरदोई-लखनऊ सीमा से रिंग रोड: 541 करोड़ रुपये की लागत से बना 32 किलोमीटर लंबा 4-लेन मार्ग (NH-731, पैकेज-4)।
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मड़ियांव-इंजीनियरिंग कॉलेज फ्लाईओवर: लखनऊ में यातायात को जाम-मुक्त करने के लिए 109 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला 1 किलोमीटर लंबा 4-लेन फ्लाईओवर (NH-24A), जिसका शिलान्यास किया गया।
हाई-टेक ITMS तकनीक से सुरक्षित होगा सफर
सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से लैस किया गया है। इसके तहत पूरे रूट पर 21 वैरिएबल मैसेज साइन (VMS), 63 पीटीजेड (PTZ) कैमरे, 27 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम (VIDS), 62 इमरजेंसी कॉल बॉक्स, 6 स्पीड मेजरमेंट रडार और 9 स्टेटिक वे-ब्रिज लगाए गए हैं। 120 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाले वाहनों की सुरक्षा के लिए यह सिस्टम बेहद कारगर साबित होगा, हालांकि इस एक्सप्रेसवे पर कुछ धीमे चलने वाले वाहनों पर पाबंदी रहेगी।
प्रदूषण से राहत, व्यापार और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार
इस एक्सप्रेसवे के खुलने से न सिर्फ ईंधन और समय की भारी बचत होगी, बल्कि पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों का दबाव और प्रदूषण भी कम होगा। यह रूट लखनऊ और कानपुर के बीच बन रहे डिफेंस कॉरिडोर और औद्योगिक इकाइयों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। इसके आसपास बड़े पैमाने पर गोदाम (वेयरहाउस), लॉजिस्टिक पार्क, आवासीय परियोजनाएं और नए व्यवसाय विकसित होंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। किसान भी अब अपनी सब्जियों और कृषि उत्पादों को बिना समय गंवाए सीधे मंडियों तक पहुंचा सकेंगे।
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