श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस उमर अब्दुल्ला के उस गंभीर और सनसनीखेज आरोप के खिलाफ भेजा गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भाजपा उनकी सरकार गिराने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायकों को करोड़ों रुपये और मंत्री पद का लालच देकर तोड़ने की कोशिश कर रही है।
क्या था मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का गंभीर आरोप?
पिछले सप्ताह हजरतबल में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला था। उन्होंने दावा किया था कि जम्मू क्षेत्र के नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक विधायक ने खुद उन्हें जानकारी दी है कि भाजपा में शामिल होने के बदले उसे 20 से 30 करोड़ रुपये और नई सरकार में मंत्री पद की पेशकश की गई थी। उमर अब्दुल्ला ने यह भी आरोप लगाया था कि इस खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के खेल में भाजपा का एक वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल है, जो सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी करता है।
भाजपा ने बताया—’झूठा, बेबुनियाद और मानहानिकारक’
भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत पाल शर्मा के निर्देश पर वरिष्ठ अधिवक्ता परिमोक्ष सेठ के माध्यम से यह 3 पन्नों का कानूनी नोटिस भेजा गया है। भाजपा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें ‘पूरी तरह असत्य, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से रहित’ बताया है। पार्टी का कहना है कि सीएम ने जानबूझकर भाजपा की सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए यह भ्रामक बयान दिया है।
7 दिन का अल्टीमेटम, वरना 100 करोड़ का ठुकेगा हर्जाना
इस कानूनी नोटिस के जरिए भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने सख्त शर्तें रखी हैं:
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सार्वजनिक माफी की मांग: उमर अब्दुल्ला को 7 दिनों के भीतर अपने आरोपों को लिखित रूप में वापस लेना होगा और सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगनी होगी।
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100 करोड़ का मानहानि केस: यदि मुख्यमंत्री निर्धारित समय सीमा के अंदर माफी नहीं मांगते हैं या आरोपों के पुख्ता सबूत पेश नहीं करते हैं, तो भाजपा सक्षम न्यायालय में उनके खिलाफ 100 करोड़ रुपये के हर्जाने के साथ दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) मानहानि का मुकदमा दायर करेगी।
फिलहाल इस कानूनी नोटिस के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस या मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस विवाद ने राज्य के सियासी पारे को बेहद गर्म कर दिया है।
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