रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया: क्या लगेगा 9 घंटे पहले का सूतक काल? 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांधने का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त

भाई-बहन के असीम स्नेह, विश्वास और सुरक्षा का महापर्व रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त को अत्यंत विशेष खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग के बीच मनाया जा रहा है। सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर इस बार साल का दूसरा और अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) लगने जा रहा है। इस खगोलीय घटना की खबर सामने आते ही देशभर के श्रद्धालुओं और बहनों के मन में यह चिंता पैदा हो गई है कि क्या ग्रहण के कारण रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कोई रुकावट आएगी, क्या मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और क्या राखी बांधने के समय में कोई बदलाव करना पड़ेगा। भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार, यह आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त की सुबह लगभग 08 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होकर पूर्वाह्न 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा, जबकि इसकी उपच्छाया सुबह 06:55 से दोपहर 12:30 बजे तक प्रभावी रहेगी। यह समय सीधे तौर पर रक्षाबंधन के प्रातःकालीन उत्सव के साथ टकरा रहा है, जिसके कारण ग्रहण की दृश्यता और सूतक काल के नियमों को समझना बेहद जरूरी हो गया है।

क्या भारत में लगेगा सूतक काल? जानिए धर्मशास्त्रों का स्पष्ट और अकाट्य नियम

वैदिक ज्योतिष और हिंदू धर्मशास्त्रों में ग्रहण और उसके सूतक काल को लेकर अत्यंत स्पष्ट और प्रामाणिक नियम निर्धारित किए गए हैं। सामान्यतः चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण स्पर्श होने से ठीक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। यदि यह ग्रहण भारत में मान्य होता, तो इसका सूतक काल 27 अगस्त की देर रात से ही प्रभावी हो जाता।

हालांकि, ‘धर्मसिंधु’, ‘निर्णयसिंधु’ और ‘वराहमिहिर संहिता’ जैसे प्रतिष्ठित ग्रंथों का सर्वमान्य सिद्धांत है—”यत्र दृश्यते तत्र फलम्”, अर्थात् कोई भी खगोलीय ग्रहण जिस भू-भाग पर नंगी आंखों से दिखाई देता है, केवल उसी स्थान पर उसके धार्मिक नियम, सूतक काल, पूजा निषेध और अन्य पाबंदियां लागू होती हैं। खगोल वैज्ञानिकों और पंचांग कर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि 28 अगस्त की सुबह जब यह ग्रहण लगेगा, तब भारत में सूर्योदय हो चुका होगा और चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा। दिन के उजाले में चंद्रमा दृश्यमान न होने के कारण यह चंद्र ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा।

जब ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, तो भारत में इसका सूतक काल पूरी तरह से ‘शून्य’ और अमान्य रहेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत में न तो मंदिरों के कपाट बंद होंगे, न ही भोजन पकाने या खाने पर कोई रोक होगी और न ही रक्षाबंधन के किसी भी मांगलिक अनुष्ठान पर कोई प्रतिबंध लगेगा।

28 अगस्त को भाई की कलाई पर किस समय बांधें राखी? जानिए सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त

भारत में सूतक काल मान्य न होने के कारण बहनें बिना किसी भय या संकोच के पूरे दिन शुभ मुहूर्तों में अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं। पूर्णिमा तिथि और शुभ चौघड़िया के अनुसार दिनभर रक्षा सूत्र बांधने के लिए निम्नलिखित अत्यंत पावन और फलदायी समय उपलब्ध रहेंगे:

  • प्रातःकाल का सर्वोत्तम अमृत मुहूर्त (सुबह 05:57 से 09:48 बजे तक): यह दिन का सबसे श्रेष्ठ और सात्विक समय है। पूर्णिमा तिथि सुबह 09:48 बजे तक पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी। इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार रहता है, इसलिए सुबह के समय पूजा संपन्न करना सबसे मंगलकारी माना जाएगा।

  • पूर्वाह्न का चर व लाभ मुहूर्त (सुबह 09:15 से 10:30 बजे तक): यदि किसी कारणवश सुबह जल्दी अनुष्ठान नहीं हो पाता है, तो सुबह 10:30 बजे तक का समय भी राखी बांधने के लिए बहुत अनुकूल है।

  • दोपहर का सर्वदोषनाशक ‘अभिजीत मुहूर्त’ (दोपहर 11:58 से 12:48 बजे तक / 12:30 से 01:15 बजे तक): ज्योतिष शास्त्र में अभिजीत मुहूर्त को भगवान श्रीहरि विष्णु का चक्र माना गया है, जो सभी प्रकार के सूक्ष्म दोषों को नष्ट कर देता है। राहुकाल समाप्त होते ही अभिजीत मुहूर्त में राखी बांधना अत्यंत शुभ और ऐश्वर्य प्रदाता रहेगा।

  • अपराह्न (दोपहर बाद) का शुभ चौघड़िया (दोपहर 01:45 से 03:30 बजे तक): दूर-दराज से आने वाले भाई-बहनों के लिए दोपहर का यह समय लाभ चौघड़िया से युक्त और सुविधाजनक रहेगा।

  • शाम का प्रदोष व गोधूलि वेला मुहूर्त (शाम 05:12 से 06:45 बजे तक): सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में रक्षा सूत्र बांधने से भाई को दीर्घायु और आरोग्य का वरदान मिलता है।

राहुकाल से रहें सावधान: भूलकर भी इस डेढ़ घंटे में न करें रक्षाबंधन अनुष्ठान

भले ही ग्रहण का सूतक काल भारत में न लग रहा हो, लेकिन सनातन परंपरा में किसी भी शुभ व मांगलिक कार्य के दौरान दैनिक ‘राहुकाल’ का त्याग करना अनिवार्य माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु एक क्रूर और छाया ग्रह है, और राहुकाल की अवधि में किए गए शुभ कार्यों में विघ्न आने या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ने की आशंका रहती है।

28 अगस्त शुक्रवार के दिन पंचांग के अनुसार राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 30 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक रहेगा। सभी बहनों को यह विशेष सावधानी बरतनी चाहिए कि इस डेढ़ घंटे की समयावधि में भाई को तिलक न लगाएं और न ही कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें। सुबह 10:30 बजे से पहले या फिर दोपहर 12:00 बजे राहुकाल समाप्त होने के बाद ही पूजा आरंभ करें।

सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगा रक्षाबंधन: भाइयों को मिलेगा आरोग्य और ऐश्वर्य का वरदान

इस वर्ष 28 अगस्त का दिन केवल रक्षाबंधन ही नहीं, बल्कि ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ के दुर्लभ संयोग से भी सुशोभित हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत बलशाली और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला योग माना जाता है। इस योग में किए गए सभी धार्मिक संकल्प, पूजा-पाठ और रक्षा सूत्र बंधन का फल कई गुना बढ़ जाता है।

जब बहनें इस शुभ योग में अपने भाई की कलाई पर पवित्र रक्षा सूत्र बांधेंगी, तो इससे भाइयों के जीवन पर आने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात संकट दूर होंगे, नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलेगी और कार्यक्षेत्र व व्यापार में अप्रत्याशित सफलता के रास्ते खुलेंगे। यह संयोग भाई-बहन के आपसी रिश्ते में अटूट प्रेम और विश्वास को और अधिक गहरा करेगा।

राखी बांधने की शास्त्रीय विधि और वैदिक रक्षा मंत्र का महत्व

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शास्त्रीय विधि-विधान का पालन करने से अनुष्ठान का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ जाता है। पूजा के लिए तांबे, पीतल या चांदी की थाली में रोली (कुमकुम), पीले अक्षत (अखंडित चावल), चंदन, ताजी मिठाइयां, दीपक और रक्षा सूत्र सजाएं। साथ ही पूजा में एक श्रीफल (नारियल) अवश्य रखें।

सर्वप्रथम घर के मंदिर में भगवान श्री गणेश और भगवान श्री कृष्ण को पहली राखी अर्पित करें। इसके बाद भाई को लकड़ी की चौकी या स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिठाएं। दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है, इसलिए दक्षिण मुखी होकर कभी भी रक्षा सूत्र नहीं बंधवाना चाहिए।

बहन सबसे पहले भाई के आज्ञा चक्र (माथे) पर चंदन और रोली का तिलक लगाए और उस पर अक्षत लगाए। अक्षत अखंड सौभाग्य और विजय का प्रतीक है। इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर तीन गांठें लगाते हुए रक्षा सूत्र बांधे। ये तीन गांठें त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के दिव्य आशीर्वाद का प्रतिनिधित्व करती हैं। राखी बांधते समय बहनों को निम्नलिखित पौराणिक रक्षा मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करना चाहिए:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

मंत्रोच्चार के बाद घी के दीपक से भाई की आरती उतारें ताकि नजर दोष और बुरी बलाएं दूर हों। फिर भाई को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं। इसके पश्चात भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर या मस्तक पर हाथ रखकर आशीर्वाद ले और उसकी आजीवन सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेते हुए सामर्थ्य अनुसार उपहार भेंट करे।

विदेशों में रहने वाले भारतीयों (NRIs) के लिए जरूरी दिशा-निर्देश

जो भारतीय नागरिक अमेरिका (USA), कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK), यूरोप, दक्षिण अमेरिका या अटलांटिक क्षेत्र के देशों में निवास कर रहे हैं, उनके लिए नियम भिन्न होंगे। चूंकि यह आंशिक चंद्र ग्रहण इन पश्चिमी देशों में रात के समय स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, इसलिए वहां रहने वाले श्रद्धालुओं पर सूतक काल के नियम पूरी तरह लागू होंगे।

विदेश में रहने वाले भाई-बहनों को चाहिए कि वे ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पहले शुरू होने वाले सूतक काल और ग्रहण की पूरी अवधि के दौरान राखी बांधने का कार्य न करें। जब वहां ग्रहण पूरी तरह समाप्त हो जाए और मोक्ष काल आ जाए, तब स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें और उसके बाद ही शुभ मुहूर्त में रक्षाबंधन का पावन अनुष्ठान संपन्न करें।

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