सुबह इस समय तक जरूर बांध लें भाई की कलाई पर राखी; जानें सूतक काल का सच, राहुकाल और दिनभर के सबसे शुभ मुहूर्त

भाई-बहन के अटूट स्नेह, अटूट विश्वास और सुरक्षा का महापर्व रक्षाबंधन इस वर्ष बेहद दुर्लभ खगोलीय व ज्योतिषीय घटनाक्रम के बीच मनाया जा रहा है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर इस बार साल का दूसरा और अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण घटित होने जा रहा है। इस खगोलीय घटना की सूचना मिलते ही देशभर के भाई-बहनों में इस बात को लेकर गहरी उत्सुकता और चिंता है कि ग्रहण किस समय शुरू होगा और सुबह के समय किस निश्चित अवधि से पहले राखी बांधने का धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए। वैदिक पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, पूर्णिमा तिथि प्रातः काल सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक पूर्ण रूप से प्रभावी रहेगी। इसके साथ ही सुबह के समय अत्यंत शुभ और अमृत फलदायी चौघड़िया योग विद्यमान रहेंगे। यही कारण है कि धर्माचार्यों और ज्योतिषाचार्यों द्वारा सुबह 09:48 बजे से पहले ही भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने को सबसे अधिक फलदायी और श्रेष्ठ बताया जा रहा है।

चंद्र ग्रहण का सटीक समय: जानें कब से कब तक रहेगा ग्रहण काल

खगोलीय गणना के अनुसार, 28 अगस्त को लगने वाला यह आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) कई घंटों की अवधि तक अंतरिक्ष में प्रभावी रहेगा। भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार इस खगोलीय घटना का पूरा विवरण इस प्रकार है:

  • उपच्छाया का प्रारंभ (Penumbral Phase Starts): सुबह 06 बजकर 55 मिनट पर।

  • आंशिक ग्रहण का प्रारंभ (Partial Eclipse Starts): सुबह 08 बजकर 04 मिनट पर।

  • ग्रहण का परमग्रास यानी पीक समय (Maximum Eclipse): सुबह 09 बजकर 43 मिनट पर (इस समय चंद्रमा का 93% से अधिक भाग पृथ्वी की गहरी छाया में रहेगा)।

  • आंशिक ग्रहण की समाप्ति (Partial Eclipse Ends): सुबह 11 बजकर 21 मिनट पर।

  • उपच्छाया की पूर्ण समाप्ति (Penumbral Phase Ends): दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर।

खगोल विज्ञान के अनुसार इस ग्रहण की कुल दृश्य व उपच्छाया अवधि लगभग 5 घंटे 35 मिनट की रहेगी। यह समय सीधे तौर पर रक्षाबंधन के प्रातःकालीन उत्सव के साथ संरेखित हो रहा है।

क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल? जानिए धर्मशास्त्रों का अकाट्य नियम

सामान्यतः चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण स्पर्श होने से ठीक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। यदि यह ग्रहण भारत में मान्य होता, तो इसका सूतक काल पूर्व रात्रि से ही लागू हो जाता और सभी प्रकार के धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और रक्षा सूत्र बांधने पर रोक लग जाती।

हालांकि, ‘निर्णयसिंधु’ और ‘धर्मसिंधु’ जैसे प्रतिष्ठित धर्मग्रंथों का स्पष्ट सिद्धांत है—”यत्र दृश्यते तत्र फलम्” अर्थात् कोई भी ग्रहण जिस भू-भाग पर नंगी आंखों से देखा जा सके, सूतक काल, मंदिरों के कपाट बंद करने के नियम और धार्मिक निषेध केवल वहीं प्रभावी होते हैं। खगोल वैज्ञानिकों और पंचांग कर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि सुबह जब यह ग्रहण घटित होगा, तब भारत में सूर्योदय हो चुका होगा और चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा। भारत में दिन का उजाला होने के कारण यह चंद्र ग्रहण देश के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा।

जब ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, तो भारत में इसका सूतक काल पूरी तरह से ‘शून्य’ यानी अमान्य रहेगा। इसका सीधा अर्थ है कि भारत में रहने वाले नागरिकों के लिए पूजा-पाठ, खान-पान या रक्षाबंधन मनाने पर ग्रहण की कोई पाबंदी नहीं होगी।

सुबह इस समय तक बांध लें राखी: प्रातःकाल का सर्वश्रेष्ठ अमृत मुहूर्त

यद्यपि ग्रहण का कोई धार्मिक दोष भारत में नहीं है, फिर भी पूर्णिमा तिथि के पुण्य काल का लाभ उठाने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है।

  • सर्वश्रेष्ठ प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक।

  • मुहूर्त की विशेषता: इस समय सावन पूर्णिमा की उदयातिथि विद्यमान रहेगी और साथ ही अमृत व शुभ का चौघड़िया सक्रिय रहेगा।

  • भद्रा का कोई साया नहीं: इस समय किसी भी प्रकार की भद्रा नहीं रहेगी, जिससे यह समय पूरी तरह निर्दोष, मंगलकारी और सर्वकल्याणकारी है।

जो बहनें अपने भाई की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि की कामना करती हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुबह 09:48 बजे से पहले रक्षा सूत्र बांधने का मुख्य अनुष्ठान संपन्न कर लेना चाहिए।

दोपहर और शाम के वैकल्पिक शुभ मुहूर्त: राहुकाल से बचना क्यों है जरूरी?

यदि किसी कारणवश या यात्रा में देरी की वजह से आप सुबह 09:48 बजे तक राखी नहीं बांध पाते हैं, तो उदयातिथि के नियम के अनुसार आप दोपहर या शाम के शुभ चौघड़िया में भी रक्षाबंधन मना सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको दिन के ‘राहुकाल’ से बचना होगा।

पंचांग के अनुसार शुक्रवार के दिन राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 30 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक रहेगा। राहुकाल को वैदिक ज्योतिष में अशुभ माना गया है, इसलिए इस डेढ़ घंटे के दौरान राखी बांधने से बचें। राहुकाल के अतिरिक्त दिनभर के अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • सर्वदोषनाशक ‘अभिजीत मुहूर्त’: दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट (अथवा दोपहर 12:30 से 01:15 के मध्य)। अभिजीत मुहूर्त में किसी भी प्रकार का ग्रह दोष स्वतः समाप्त हो जाता है।

  • अपराह्न (दोपहर बाद) का शुभ समय: दोपहर 01 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 30 मिनट तक (लाभ चौघड़िया)।

  • शाम का प्रदोष व गोधूलि वेला मुहूर्त: शाम 05 बजकर 12 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 45 मिनट तक (चर व लाभ चौघड़िया)। सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में रक्षा सूत्र बांधना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग में रक्षाबंधन: भाई की दीर्घायु और समृद्धि के लिए विशेष संयोग

इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ के दिव्य महासंयोग में मनाया जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत शक्तिशाली और अभीष्ट फल देने वाला माना गया है। इस योग में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान, भाई को लगाया गया तिलक और बांधी गई राखी भाई के जीवन में आने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात संकटों को दूर करती है। यह योग भाइयों को आरोग्य, कार्यक्षेत्र में सफलता और मान-सम्मान का वरदान प्रदान करता है।

राखी बांधने की शास्त्रीय पूजा विधि और महामंत्र

शुभ मुहूर्त में पूजा की थाली तैयार करें। थाली में शुद्ध कुमकुम (रोली), अक्षत (अखंडित चावल), पीला चंदन, घी का दीपक, रक्षा सूत्र (राखी), ताजी मिठाइयां और एक नारियल रखें। सर्वप्रथम घर के मंदिर में भगवान श्री गणेश और भगवान श्री कृष्ण को पहली राखी अर्पित करें।

इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बिठाएं। कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रक्षा सूत्र नहीं बंधवाना चाहिए। बहन सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और चंदन का तिलक लगाए और उस पर अक्षत लगाए। इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर तीन गांठें लगाते हुए रक्षा सूत्र बांधे। तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के दिव्य आशीर्वाद की प्रतीक हैं।

राखी बांधते समय बहनों को इस पौराणिक रक्षा मंत्र का स्पष्ट उच्चारण अवश्य करना चाहिए:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

मंत्रोच्चार के बाद दीपक से भाई की आरती उतारें ताकि नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो। फिर मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं। इसके पश्चात भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले और उसकी आजीवन सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेते हुए सामर्थ्य अनुसार उपहार भेंट करे।

विदेशों में रहने वाले भारतीयों (NRIs) के लिए जरूरी नियम

जो भारतीय नागरिक अमेरिका (USA), कनाडा, ब्रिटेन (UK), यूरोप, दक्षिण अमेरिका या अटलांटिक महासागर के निकटवर्ती देशों में निवास कर रहे हैं, उनके लिए नियम भिन्न होंगे। चूंकि यह आंशिक चंद्र ग्रहण इन पश्चिमी देशों में रात के समय स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, इसलिए वहां स्थानीय समयानुसार 9 घंटे पहले का सूतक काल और ग्रहण के सभी धार्मिक नियम पूरी तरह लागू होंगे।

विदेश में रहने वाले भाई-बहनों को ग्रहण काल और सूतक काल समाप्त होने तथा ग्रहण के मोक्ष के बाद ही स्नान करके शुद्ध मन से रक्षाबंधन का पर्व मनाना चाहिए।

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