दागी सांसदों-विधायकों पर कसेगा इलाहाबाद हाई कोर्ट का शिकंजा, मुकदमों की निगरानी के लिए बनेगा खास डिजिटल पोर्टल…

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में दागी माननीयों की अब खैर नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ राज्य की विशेष अदालतों (MP-MLA Courts) में लंबित आपराधिक मुकदमों के त्वरित निस्तारण और प्रभावी मॉनीटरिंग को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुकदमों के ट्रायल की निगरानी के लिए एक पारदर्शी और सुदृढ़ डिजिटल तंत्र विकसित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। अदालत ने साफ कहा कि अब इस मामले में और अधिक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ट्रायल की मॉनीटरिंग के लिए हाई-टेक पोर्टल की तैयारी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि सांसदों और विधायकों के मुकदमों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए एक उचित पोर्टल तैयार किया जाए। इस पोर्टल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ट्रायल की प्रक्रिया में कहां देरी हो रही है और किन कारणों से मामले लंबित हैं। कोर्ट का मानना है कि एक पारदर्शी तंत्र होने से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और रसूखदार नेताओं के मुकदमों में होने वाली अनावश्यक देरी को रोका जा सकेगा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: काफी वक्त बीत चुका, अब और देरी नहीं

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि आपराधिक मुकदमों का ट्रायल लंबे समय से खिंच रहा है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “काफी समय पहले ही निर्देश दिए जा चुके थे, अब और वक्त जाया न किया जाए।” अदालत ने मॉनीटरिंग सिस्टम को जल्द से जल्द क्रियान्वित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि न्यायपालिका की छवि और जनता का विश्वास बना रहे। इस निर्देश के बाद अब शासन और प्रशासन स्तर पर पोर्टल निर्माण की कवायद तेज होने की उम्मीद है।

विशेष अदालतों की कार्यप्रणाली पर नजर

वर्तमान में यूपी की विशेष एमपी-एमएलए अदालतों में सैकड़ों गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। नए पोर्टल के जरिए हाई कोर्ट सीधे इन अदालतों की कार्यवाही पर नजर रख सकेगा। इसमें गवाहों की उपस्थिति, साक्ष्यों की स्थिति और आदेशों के अनुपालन की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट के इस कदम से उत्तर प्रदेश में ‘क्लीन पॉलिटिक्स’ की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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