यूपी चुनाव से पहले सियासत में बड़ा सुरक्षा अलर्ट: सीएम योगी, अखिलेश, मायावती और अपर्णा समेत 52 दिग्गजों को मिला बुलेटप्रूफ जैकेट का सुरक्षा कवच

उत्तर प्रदेश की सियासी सरगर्मियों के बीच राजधानी लखनऊ स्थित सुरक्षा मुख्यालय ने राज्य के शीर्ष राजनेताओं की सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व और बड़ा कदम उठाया है। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, भारी जनसभाओं और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी किए गए खुफिया इनपुट के मद्देनजर सत्ता पक्ष और विपक्ष के 52 प्रमुख नेताओं को विशेष बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई गई है।

इस हाई-प्रोफाइल सुरक्षा सूची में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष व भाजपा नेता अपर्णा यादव समेत कई कद्दावर चेहरे शामिल हैं।

प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब अलग-अलग सुरक्षा श्रेणियों (Y से लेकर Z और Z+ श्रेणी) के नेताओं की सुरक्षा का नए सिरे से आकलन करते हुए इतने बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत बुलेटप्रूफ जैकेट का अतिरिक्त सुरक्षा घेरा दिया गया है।

दो चरणों में बांटी गई जैकेट: पहले 8 अतिसंवेदनशील नेता, फिर 44 को मिला कवर

सुरक्षा मुख्यालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त समीक्षा के बाद सुरक्षा उपकरणों के वितरण को दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया गया है:

  • पहला चरण (अतिसंवेदनशील 8 नेता): शुरुआती चरण में राज्य के उन 8 शीर्ष नेताओं को यह जैकेट सौंपी गई, जिनकी सुरक्षा का जोखिम स्तर सबसे अधिक था। इनमें मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और शीर्ष संवैधानिक पदों पर रहे प्रमुख राजनेता शामिल रहे।

  • दूसरा चरण (44 प्रमुख जनप्रतिनिधि): दूसरे चरण के तहत राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्रियों, प्रमुख विपक्षी नेताओं, विधायकों और महत्वपूर्ण पदों पर आसीन 44 अन्य जनप्रतिनिधियों को बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई गई।

राज्य में इस समय कुल 98 नेताओं और गणमान्य हस्तियों को अलग-अलग श्रेणियों की सुरक्षा हासिल है, जिनमें से खतरे की आशंका के आधार पर 52 नेताओं को यह विशेष जैकेट दी गई है।

दलगत राजनीति से परे सुरक्षा: 11 कैबिनेट मंत्री और विपक्षी नेता भी शामिल

इस सुरक्षा सूची की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी एक दल को प्राथमिकता देने के बजाय पूरी तरह से इंटेलिजेंस इनपुट और खतरे के आकलन (Threat Perception) को आधार बनाया गया है।

सूची में उत्तर प्रदेश सरकार के 11 प्रमुख कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। इनमें निषाद पार्टी के अध्यक्ष व मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, सुभासपा प्रमुख व पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह के नाम प्रमुख हैं।

इसके साथ ही रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती जैसे विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं को भी यह सुरक्षा कवच दिया गया है।

₹10 लाख की अत्याधुनिक जैकेट: जानिए क्या है इसकी खासियत

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं को उपलब्ध कराई गई प्रत्येक बुलेटप्रूफ जैकेट की अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपये है। यह कोई सामान्य सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य मानकों पर तैयार किया गया विशेष बॉडी आर्मर है:

  • उन्नत बैलिस्टिक सुरक्षा: यह जैकेट आधुनिक ऑटोमैटिक हथियारों, प्वाइंट-ब्लैंक रेंज की फायरिंग और विस्फोटकों से निकलने वाले घातक छर्रों (Shrapnel) को रोकने में सक्षम है।

  • हल्का और एर्गोनॉमिक डिजाइन: सार्वजनिक कार्यक्रमों, रोड शो और यात्राओं के दौरान राजनेताओं की गतिशीलता बनी रहे, इसके लिए इसे हल्के और मजबूत कंपोजिट फाइबर से तैयार किया गया है।

  • कुर्ते या जैकेट के अंदर पहनने योग्य: इसका डिजाइन ऐसा है कि इसे सामान्य कपड़ों या सदरी के भीतर भी आसानी से पहना जा सकता है, जिससे भीड़भाड़ के दौरान सुरक्षा घेरा अदृश्य बना रहे।

Y से लेकर Z+ सुरक्षा श्रेणी के नियमों में बदलाव और अतिरिक्त सुरक्षा

सुरक्षा नियमावली के अनुसार, आमतौर पर Z और Z+ श्रेणी के वीआईपी सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के लिए बुलेटप्रूफ सुरक्षा उपकरण अनिवार्य मानक माने जाते हैं। हालांकि, Y श्रेणी सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के मामले में यह प्रावधान अनिवार्य नहीं होता और केवल विशेष खतरे के आकलन पर ही दिया जाता है।

इस बार यूपी में कई Y श्रेणी सुरक्षा प्राप्त मंत्रियों और नेताओं को भी यह जैकेट दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की जगह नहीं लेगी, बल्कि कमांडो, गनर और एस्कॉर्ट गाड़ियों के पारंपरिक सुरक्षा घेरे के साथ एक ‘अतिरिक्त व्यक्तिगत सुरक्षा परत’ (Additional Layer of Protection) के तौर पर काम करेगी।

चुनावी रैलियों की गहमागहमी और इंटेलिजेंस अलर्ट का असर

उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल बनते ही नेताओं के दौरे, नुक्कड़ सभाएं, जन संपर्क अभियान और विशाल रैलियां कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में नेताओं का सीधा संपर्क हजारों लोगों की अनियंत्रित भीड़ से होता है।

हाल के महीनों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं की सुरक्षा में चूक के मामलों और केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त सुरक्षा परामर्श (Security Advisory) के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के सुरक्षा विंग ने विस्तृत ऑडिट किया था। इसी ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर चुनाव पूर्व किसी भी अप्रिय स्थिति या खतरे से निपटने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।

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