
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में एमबीबीएस की छात्रा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला। साथी छात्राओं और हॉस्टल प्रबंधन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना की खबर फैलते ही पूरे मेडिकल कॉलेज परिसर में मातम और सनसनी फैल गई। पुलिस ने छात्रा के कमरे की बारीकी से तलाशी ली, लेकिन मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे आत्महत्या के पीछे की सटीक वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, मृतका मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी और कॉलेज परिसर स्थित हॉस्टल में रहकर अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर रही थी। रोज की तरह जब वह सुबह काफी देर तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकली और साथी छात्राओं द्वारा दरवाजा खटखटाने पर भी अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। सहेलियों ने तुरंत इसकी सूचना हॉस्टल वार्डन और कॉलेज प्रशासन को दी। प्रशासन की सूचना पर स्थानीय पुलिस बल और फॉरेंसिक फील्ड यूनिट तुरंत मौके पर पहुंच गए।
पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में जब हॉस्टल के कमरे का दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। छात्रा पंखे के सहारे फंदे पर लटकी हुई थी। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने तुरंत कमरे को सील कर फिंगरप्रिंट, मोबाइल फोन, लैपटॉप और डायरी जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने कमरे के हर कोने की गहन तलाशी ली, लेकिन मौके से कोई सुसाइड नोट या पत्र नहीं मिला।
अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट न मिलने के कारण मामले की तह तक जाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस ने छात्रा का मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर जांच के लिए साइबर सेल को भेज दिया है। कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड्स (CDR) और सोशल मीडिया चैट्स की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले उसने किससे बातचीत की थी और क्या वह किसी मानसिक दबाव या तनाव से गुजर रही थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने छात्रा के परिजनों को फोन पर इसकी जानकारी दी, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन मुजफ्फरनगर के लिए रवाना हो गए हैं। कॉलेज के सहपाठियों और शिक्षकों से भी पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। साथी छात्राओं का कहना है कि वह व्यवहार में काफी शांत और पढ़ाई में होनहार थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से किसी बात को लेकर गुमसुम नजर आ रही थी।
जांच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या यह कदम पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं के तनाव के चलते उठाया गया या फिर इसके पीछे कोई पारिवारिक या व्यक्तिगत समस्या थी। मेडिकल की कठिन पढ़ाई के दौरान छात्रों में डिप्रेशन और मानसिक दबाव के बढ़ते मामलों को देखते हुए कॉलेज प्रशासन की काउंसलिंग प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने हॉस्टल वार्डन से भी छात्राओं की नियमित निगरानी और उपस्थिति रजिस्टर को लेकर विस्तृत पूछताछ की है।
क्षेत्राधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद बताया कि शव को विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। मौत का सही समय और वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगा।
पुलिस का कहना है कि परिजनों की लिखित तहरीर और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मृतका के दोस्तों और करीबी संपर्कों से भी बात की जा रही है ताकि किसी भी तरह के उत्पीड़न, रैगिंग या अन्य विवाद की संभावना की निष्पक्ष जांच हो सके। फिलहाल मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हॉस्टल में अतिरिक्त सुरक्षा और काउंसलिंग सहायता सक्रिय कर दी है ताकि अन्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर इस दुखद घटना का नकारात्मक असर न पड़े। मुजफ्फरनगर पुलिस सभी एंगल से इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है।
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