
नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और चकाचौंध वाली लाइफस्टाइल में लोग अक्सर स्वाद के चक्कर में भारी और तैलीय (ऑयली) खाने को ही ‘हेल्दी’ समझने की भूल कर बैठते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में मौजूद स्वाद और सेहत का असली संतुलन दक्षिण भारतीय यानी साउथ इंडियन फूड में छिपा है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप लंबी उम्र और बीमारियों से मुक्त शरीर चाहते हैं, तो इडली, डोसा और सांभर जैसे व्यंजन सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि पोषण का भी पावरहाउस हैं।
फोर्टिस के एक्सपर्ट की राय: क्यों है साउथ इंडियन फूड बेस्ट?
फोर्टिस हॉस्पिटल के जाने-माने डॉक्टर शुभम वात्स्य के अनुसार, दक्षिण भारतीय भोजन के प्रति लोगों का नजरिया अब तेजी से बदल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भोजन पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से तैयार किया जाता है और इसमें इस्तेमाल होने वाली फर्मेंटेशन (खमीर उठाना) की प्रक्रिया इसे पाचन के लिए दुनिया के बेहतरीन खानों में से एक बनाती है। डॉक्टर वात्स्य का कहना है कि जहां भारी और मसालेदार खाना शरीर में सुस्ती और बीमारियां पैदा करता है, वहीं साउथ इंडियन डाइट आपको दिनभर ऊर्जावान बनाए रखती है।
पाचन तंत्र के लिए वरदान: हल्का भी और दमदार भी
साउथ इंडियन फूड की सबसे बड़ी खूबी इसका आसानी से पचना है। इडली और अप्पम जैसे व्यंजन भाप (स्टीम) में पकाए जाते हैं, जिससे इनमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है। इसके अलावा, सांभर में इस्तेमाल होने वाली अरहर की दाल और ढेरों सब्जियां शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर प्रदान करती हैं। यह भोजन न केवल वजन घटाने में मददगार है, बल्कि यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है।
पोषण से भरपूर है नारियल और मसालों का संगम
दक्षिण भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाला नारियल, राई और करी पत्ता केवल खुशबू के लिए नहीं होते, बल्कि इनके अपने औषधीय गुण हैं। नारियल जहां गुड फैट्स का स्रोत है, वहीं करी पत्ता बालों और त्वचा के लिए रामबाण माना जाता है। डॉक्टर शुभम वात्स्य की मानें तो संतुलित पोषण के लिए हफ्ते में कम से कम तीन से चार बार दक्षिण भारतीय आहार का सेवन करना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया