नई दिल्ली। गर्मियों की शुरुआत होते ही सड़कों पर गन्ने के जूस की चरखियां चलने लगती हैं। चिलचिलाती धूप में एक गिलास ठंडा गन्ने का जूस अमृत जैसा महसूस होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गन्ने को चबाकर खाना और उसका जूस पीना—इन दोनों में से आपकी सेहत के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद क्या है? इंस्टाग्राम पर मशहूर डायटीशियन श्वेता जे पांचाल ने इस उलझन को दूर करते हुए बताया है कि पोषण और शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिहाज से कौन सा विकल्प बेहतर है।
गन्ना चबाकर खाने के बेमिसाल फायदे
एक्सपर्ट के अनुसार, जब आप गन्ने के टुकड़ों को सीधे चबाकर खाते हैं, तो यह जूस पीने के मुकाबले कहीं अधिक हेल्दी होता है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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फाइबर की भरपूर मात्रा: गन्ना चबाने से आपको भरपूर मात्रा में नेचुरल फाइबर मिलता है, जो पाचन तंत्र (Gut Health) के लिए बेहतरीन है। जूस निकालते समय यह फाइबर अक्सर बाहर फेंक दिया जाता है।
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शुगर कंट्रोल: गन्ने को चबाने में मेहनत और समय लगता है। इससे शुगर आपके रक्त (Blood Flow) में बहुत धीरे-धीरे घुलती है।
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पोर्शन कंट्रोल: चबाकर खाने की एक सीमा होती है, जिससे आप जरूरत से ज्यादा कैलोरी नहीं लेते और आपको जल्दी संतुष्टि (Satiety) महसूस होती है।
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दांतों की एक्सरसाइज: गन्ने को चबाना मसूड़ों और दांतों के व्यायाम के लिए भी अच्छा माना जाता है।
गन्ने का जूस: हाइड्रेशन तो है, पर सावधानी जरूरी
गन्ने का जूस तुरंत एनर्जी देने वाला (Instant Energy Booster) पेय है, लेकिन इसके साथ कुछ कमियां भी जुड़ी हैं:
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शुगर स्पाइक का खतरा: जूस में फाइबर नहीं होता, इसलिए यह शरीर में बहुत तेजी से अवशोषित होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल अचानक से बढ़ सकता है (Sugar Spike), जो डायबिटीज के मरीजों के लिए जोखिम भरा है।
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फाइबर की कमी: जूस निकालते समय गन्ने का सारा रेशा निकल जाता है, जिससे आप केवल लिक्विड शुगर और कुछ मिनरल्स ही ले पाते हैं।
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ज्यादा कैलोरी: जूस पीना आसान होता है, इसलिए अक्सर लोग अनजाने में एक बार में 2-3 गिलास पी जाते हैं, जिससे शरीर में बहुत ज्यादा शुगर चली जाती है।
डायटीशियन की सलाह: कब और कैसे पिएं?
डायटीशियन श्वेता के मुताबिक, अगर आपको कोई मेटाबॉलिक समस्या (जैसे डायबिटीज) नहीं है और आप कुछ रिफ्रेशिंग पीना चाहते हैं, तो गन्ने का जूस पिया जा सकता है। लेकिन इसके लिए एक ‘गोल्डन रूल’ याद रखें—गन्ने का जूस हमेशा दोपहर 12 बजे से पहले पिएं। दोपहर के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म शुगर को प्रोसेस करने में धीमा हो जाता है।
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