चिकित्सा विज्ञान में आई नई तकनीकों, समय पर बीमारी का पता चलने और आधुनिक सर्जरी के चलते अब दुनिया भर में कैंसर से जंग जीतने वाले मरीजों (Cancer Survivors) की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब तक कैंसर के इलाज का एकमात्र लक्ष्य मरीज की जान बचाना माना जाता था, लेकिन अब हेल्थ एक्सपर्ट्स का नजरिया बदल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर से ठीक हो चुके लोगों को लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक सहारे की जरूरत होती है। डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ कैंसर से ठीक होना काफी नहीं है, बल्कि इलाज के बाद एक गुणवत्तापूर्ण और सामान्य जिंदगी जीना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
भ्रम टूटना जरूरी: इलाज खत्म होने का मतलब सफर का अंत नहीं
ज्यादातर कैंसर मरीज और उनके परिजन यह मान लेते हैं कि कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी पूरी होते ही कैंसर का सफर खत्म हो गया। लेकिन असल में यहीं से सर्वाइवरशिप (Survivorship) का एक नया और संवेदनशील दौर शुरू होता है। डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर के कड़े इलाज के साइड इफेक्ट्स (दुष्प्रभाव) शरीर पर कई सालों तक बने रह सकते हैं, जिनके प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है।
सर्वाइवर्स को सालों तक परेशान कर सकती हैं ये 5 शारीरिक समस्याएं
कैंसर थेरेपी के बाद मरीजों को लंबे समय तक इन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है:
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अत्यधिक थकान और नसों में दर्द: इलाज के महीनों बाद भी शरीर में कमजोरी और न्यूरोपैथी (नसों की संवेदनशीलता) बनी रहती है।
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दिल की बीमारियां: कुछ हैवी कीमोथेरेपी दवाओं का सीधा असर दिल की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।
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हार्मोनल असंतुलन: शरीर के प्राकृतिक हार्मोन में बदलाव आने से वजन बढ़ना या घटना आम हो जाता है।
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प्रजनन क्षमता पर असर: युवा मरीजों में आगे चलकर बच्चे पैदा करने से जुड़ी जटिलताएं (Infertility) आ सकती हैं।
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कैंसर दोबारा होने का जोखिम: सबसे बड़ा डर हमेशा यह बना रहता है कि कहीं कैंसर शरीर के किसी दूसरे हिस्से में वापस न लौट आए।
अदृश्य घाव: डिप्रेशन और ‘कैंसर रिटर्न’ का मानसिक खौफ
शारीरिक दिक्कतों के अलावा, ठीक हो चुके मरीज एक गंभीर मानसिक दौर से गुजरते हैं। कई सर्वाइवर्स हर छोटी बीमारी को कैंसर का दोबारा आना समझने लगते हैं, जिससे वे गंभीर डिप्रेशन (अवसाद), एंग्जायटी और मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा, याददाश्त कमजोर होना या किसी काम में ध्यान लगाने में परेशानी (Brain Fog) जैसी मानसिक चुनौतियां भी उन्हें घेर लेती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार: बेहतर जिंदगी के लिए सर्वाइवर्स आज ही अपनाएं ये 5 आदतें
विशेषज्ञों का कहना है कि अब हमारी स्वास्थ्य प्रणाली को सिर्फ इलाज तक सीमित न रहकर, ठीक हो चुके लोगों के पुनर्वास पर ध्यान देना होगा। सर्वाइवर्स को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
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फॉलो-अप को न करें मिस: इलाज खत्म होने के बाद भी डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर नियमित रूप से फुल बॉडी चेकअप और स्कैन जरूर कराएं।
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फिजियोथेरेपी और सक्रियता: शरीर की नसों और मांसपेशियों को दोबारा मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ की देखरेख में हल्की एक्सरसाइज या फिजियोथेरेपी लें।
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पौष्टिक और संतुलित खानपान: अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड और शुगर से दूरी बनाएं।
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काउंसलिंग और मानसिक सहारा: मन के डर को दूर करने के लिए थेरेपिस्ट की मदद लें या कैंसर सर्वाइवर सपोर्ट ग्रुप्स से जुड़ें, जहाँ आप अपनी बातें साझा कर सकें।
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जागरूकता और आत्म-निरीक्षण: अपने शरीर में होने वाले किसी भी नए या असामान्य बदलाव (जैसे गांठ, पुराना दर्द या अचानक वजन घटना) को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर को बताएं।
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