
पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी मानसूनी बाढ़ और भूस्खलन की भीषण तबाही के बाद अब भारत के पूर्वी और मध्य राज्यों में नदियों का उफान चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। दक्षिण बंगाल के प्रमुख नदी बेसिनों में रातभर हुई मूसलाधार बारिश और झारखंड के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार आ रहे पानी के कारण पश्चिम बंगाल में गंभीर बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अंतर्गत काम करने वाली दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (DVRRC) के निर्देश पर मैथन और पंचेत बांधों से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इसका सीधा असर दुर्गापुर स्थित दामोदर बैराज पर पड़ा है, जहां से जल निकासी बढ़ाकर 1,11,600 क्यूसेक से अधिक कर दी गई है। लगातार पानी छोड़े जाने से पूर्व बर्दवान, हुगली और हावड़ा के निचले ग्रामीण और तटीय इलाकों में पानी घुसने की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया है।
दामोदर बैराज पर बढ़ा दबाव: मैथन और पंचेत से तेजी से छोड़ा जा रहा पानी
दामोदर घाटी निगम (DVC) के बांधों और बैराजों में पानी की आवक इतनी तेज हो चुकी है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पानी छोड़ना अपरिहार्य हो गया है। दुर्गापुर स्थित दामोदर बैराज का जलस्तर गुरुवार को 210.80 फुट तक जा पहुंचा, जबकि इस बैराज का अधिकतम निर्धारित सुरक्षा स्तर 211.50 फुट है। यानी बैराज अपने खतरे के निशान से महज कुछ इंच की दूरी पर है।
समिति के सदस्य सचिव संजीव कुमार के अनुसार, झारखंड और बंगाल के सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते सहायक नदियों से मैथन और पंचेत जलाशयों में भारी मात्रा में पानी पहुंच रहा है। यदि ऊपरी इलाकों में बारिश का सिलसिला नहीं थमा, तो जलाशयों की तकनीकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ने की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है। इसी वजह से दामोदर बैराज के गेट खोलकर 1.11 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी प्रति सेकंड की दर से नीचे की ओर बहाया जा रहा है। पानी के इस प्रचंड बहाव ने डाउनस्ट्रीम के मैदानी जिलों में तबाही की घंटी बजा दी है।
बंगाल के इन जिलों पर सबसे बड़ा खतरा: पूर्व बर्दवान, हुगली और हावड़ा में अलर्ट
दामोदर, रूपनारायण और मुंडेश्वरी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने पश्चिम बंगाल के तीन प्रमुख जिलों—पूर्व बर्दवान, हुगली और हावड़ा के बड़े भूभाग के लिए संकट खड़ा कर दिया है।
-
पूर्व बर्दवान: जिले के खंडाघोष, रैना-1, रैना-2 और जमालपुर ब्लॉक के तटीय गांव सबसे पहले जलमग्न होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। यहां किसानों की हजारों हेक्टेयर धान और सब्जियों की फसलें पहले ही पानी में डूब चुकी हैं।
-
हुगली: आरामबाग, खानाकुल, पुरसुरा और गोघाट जैसे इलाके ऐतिहासिक रूप से दामोदर और द्वारकेश्वर नदी की बाढ़ की मार झेलते रहे हैं। आरामबाग महकमे के निचले इलाकों में नदी का पानी बांधों को छूने लगा है और प्रशासन ने तटबंधों की निगरानी के लिए विशेष गश्ती दल तैनात किए हैं।
-
हावड़ा: उदयनारायणपुर और अमता ब्लॉक हमेशा से बाढ़ के प्रति सबसे संवेदनशील रहे हैं। दामोदर और मुंडेश्वरी नदियों का जलस्तर बढ़ने से यहां के दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क मुख्यालय से कटने की कगार पर पहुंच गया है।
प्रशासन ने इन सभी संवेदनशील इलाकों में चेतावनी सायरन बजाने के साथ-साथ लाउडस्पीकर से मुनादी करा दी है कि लोग सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर चले जाएं।
राहत शिविरों में 24 घंटे की मुस्तैदी: कम्युनिटी किचन, दवाएं और एंटी-वेनम की व्यवस्था
बाढ़ की किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित जिलाधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य भर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निकटवर्ती पक्के स्कूलों, बहुउद्देशीय चक्रवात आश्रयों और सरकारी भवनों को तुरंत राहत शिविरों में तब्दील कर दिया गया है।
इन राहत शिविरों में शुद्ध पेयजल, प्रकाश के लिए जनरेटर, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट्स, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग शौचालय और पर्याप्त सूखे राशन की व्यवस्था की गई है। बड़े पैमाने पर सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि विस्थापित परिवारों को समय पर पका हुआ गर्म भोजन मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए सभी मेडिकल रिलीफ कैंपों में ओआरएस, डायरिया रोधी गोलियों और जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा है। बाढ़ के पानी के साथ जहरीले सांपों और आवारा जानवरों के आबादी वाले इलाकों में घुसने का बड़ा खतरा रहता है, जिसे देखते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश (एंटी-स्नेक वेनम) और रेबीज के टीकों की अतिरिक्त खेप पहुंचा दी गई है। जिला और ब्लॉक स्तर पर चौबीसों घंटे काम करने वाले इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं।
नेपाल में प्रलयंकारी आपदा का सबक: 1200 से अधिक मौतें और भारत पर असर
भारत में जारी इस बाढ़ अलर्ट के पीछे केवल मानसूनी बारिश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में मची भयंकर तबाही की कड़वी सच्चाई भी जुड़ी हुई है। नेपाल के मध्य और हिमालयी क्षेत्रों में बादल फटने और अप्रत्याशित फ्लैश फ्लड के चलते 1200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 4 हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने इस आपदा को वैश्विक जलवायु परिवर्तन का सीधा परिणाम बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने की बात कही है। नेपाल में आई इस जलप्रलय ने भारत के जल वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के कान खड़े कर दिए हैं। नेपाल से निकलने वाली तमाम नदियां अंततः भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मैदानी इलाकों से होकर ही गुजरती हैं। जब हिमालयी जलग्रहण क्षेत्रों में इतना भारी पानी बरसता है, तो उसका स्वाभाविक दबाव भारतीय सीमा में बहने वाली कोसी, गंडक, बागमती, घाघरा और तीस्ता जैसी प्रमुख नदियों पर पड़ता है, जिससे सीमावर्ती भारतीय राज्यों में जल प्रलय का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बिहार और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी नदियां लाल निशान के पार
नेपाल और बंगाल के साथ-साथ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का खतरा विकराल रूप धारण करता जा रहा है। बिहार के 15 से अधिक जिले इस समय गंभीर बाढ़ की चपेट में हैं। दरभंगा, पश्चिम चंपारण, भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया और कटिहार में गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक और बूढ़ी गंडक नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं।
पटना के गांधी घाट और दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर लाल निशान से ऊपर बना हुआ है, जबकि पुनपुन नदी खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बहकर तबाही मचा रही है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से लगातार डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिम चंपारण के कई गांवों में भीषण भू-कटान हो रहा है और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ खेत नदी में समा चुके हैं। झारखंड और मध्य प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के कारण पूरे गंगा के मैदानी इलाकों में मौसम विभाग ने अगले 48 से 72 घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी कर रखी है।
एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात: स्थानीय प्रशासन की आम जनता से अपील
बाढ़ की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की कई कंपनियों को स्पीड बोट्स और गोताखोरों के साथ पूर्व बर्दवान, हुगली, हावड़ा और बिहार के संवेदनशील जिलों में पहले से तैनात (प्री-पोजिशन) कर दिया गया है। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले मछुआरों, नाविकों और आम नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे उफनती नदियों के पास जाने की भूल न करें। कमजोर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को प्रशासन की सहायता से समय रहते सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित होने को कहा गया है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्रीय जल आयोग स्थिति पर प्रति घंटा उपग्रह और रडार के माध्यम से नजर बनाए हुए हैं। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में कम समय में अत्यधिक बारिश (क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति) नदियों के प्राकृतिक प्रवाह तंत्र को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन और आम जनता दोनों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया