लखनऊ में जाम का खेल खत्म: 12 प्रमुख मार्गों पर 25 रूट मार्शल संभालेंगे मोर्चा, ‘RTC प्रोजेक्ट’ से सेकंडों में खुलेगा ट्रैफिक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिन-प्रतिदिन बढ़ते वाहनों के दबाव, वीआईपी मूवमेंट्स, अनियोजित निर्माण कार्यों और पीक आवर्स के भीषण ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लाखों वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के ट्रैफिक विभाग ने शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले प्रमुख मार्गों पर रेंगते वाहनों को रफ्तार देने के लिए एक अत्याधुनिक और वैज्ञानिक कार्ययोजना को धरातल पर उतार दिया है। इस नई पहल को ‘रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन’ यानी आरटीसी (RTC) प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। इस परियोजना के तहत शहर के सबसे ज्यादा दबाव वाले 12 प्रमुख मार्गों को चिह्नित कर उन्हें 25 सब-रूट्स में विभाजित किया गया है और उन पर विशेष रूप से प्रशिक्षित 25 रूट मार्शलों की तैनाती की गई है।

राजधानी लखनऊ न केवल प्रदेश का प्रशासनिक केंद्र है, बल्कि पूर्वांचल, रुहेलखंड और अवध क्षेत्र का सबसे बड़ा व्यापारिक व स्वास्थ्य हब भी है। चारबाग, हजरतगंज, गोमती नगर और शहीद पथ जैसे इलाकों में रोजाना लाखों की संख्या में निजी वाहन, सिटी बसें, ऑटो-टेंपो और मालवाहक गाड़ियां गुजरती हैं। हल्की सी बारिश, किसी वाहन के बीच सड़क पर खराब होने या किसी चौराहे पर छोटे से विवाद के चलते किलोमीटर लंबा जाम लगना यहां आम बात हो चुकी थी। ट्रैफिक पुलिस की पारंपरिक व्यवस्था में अक्सर जाम लगने के बाद सूचना मिलने पर पुलिसकर्मी पहुंचते थे, जिसमें काफी समय बर्बाद होता था। इसी खामी को दूर करने के लिए आरटीसी प्रोजेक्ट को एक ‘डायनामिक मोबाइल रिस्पॉन्स मॉडल’ के रूप में तैयार किया गया है, ताकि जाम की समस्या को पैदा होते ही मौके पर ही समाप्त किया जा सके।

2. 12 मुख्य मार्ग और 25 सब-रूट्स: हजरतगंज से लेकर कमता और पॉलीटेक्निक तक तैनात रहेगी स्पेशल ब्रिगेड

लखनऊ ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आरटीसी परियोजना के पहले चरण में उन 12 मुख्य मार्गों का चयन गहन ट्रैफिक सर्वे और जीआईएस मैपिंग के आधार पर किया गया है, जहां पीक आवर्स के दौरान वाहनों की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रति घंटा से भी नीचे गिर जाती है। इन 12 बड़े मार्गों को छोटे-छोटे 25 सब-रूट्स में इसलिए बांटा गया है ताकि हर सेक्टर की जिम्मेदारी तय हो सके और किसी भी इलाके में रुकावट आने पर नजदीकी पेट्रोलिंग यूनिट तुरंत हरकत में आ सके।

इस योजना के दायरे में आने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शहर का हृदय स्थल हजरतगंज क्षेत्र, महानगर क्षेत्र, आधुनिक आवासीय व व्यावसायिक हब गोमती नगर, विभूति खंड, पुराना शहर वजीरगंज, अवध चौराहे से जुड़ा कृष्णानगर, कैंटोनमेंट (कैंट) क्षेत्र, ऐतिहासिक चौक इलाका, ट्रांस-गोमती का प्रवेश द्वार पॉलीटेक्निक चौराहा, अयोध्या रोड का कमता तिराहा, कानपुर रोड पर स्थित बाराबिरवा चौराहा तथा कैसरबाग बस टर्मिनल क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी 12 मार्गों पर तैनात किए गए 25 सब-रूट मार्शल पूरे दिन सक्रिय गश्त पर रहेंगे। चौराहे पर एक जगह खड़े रहने के बजाय ये मार्शल अपने-अपने तय रूटों पर लगातार भ्रमणशील रहकर सड़क किनारे लगने वाले अवैध ठेलों, गलत पार्किंग और ऑटो रिक्शा के बेतरतीब ठहराव को भी रोकेंगे।

3. 42 में से 25 रेसर मोबाइल बने रूट मार्शल: आधुनिक गैजेट्स और लाउड हीलर से लैस जवान

इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने अपने मौजूदा संसाधनों का पुनर्गठन कर उन्हें ज्यादा धारदार बनाया है। पुलिस विभाग के पास पहले से उपलब्ध 42 ‘रेसर मोबाइल’ बाइकों के बेड़े में से 25 चुनिंदा बाइकों को तकनीकी रूप से अपग्रेड कर उन्हें ‘सब-रूट मार्शल’ के रूप में रूपांतरित किया गया है। प्रत्येक रेसर मोबाइल बाइक पर दो जांबाज पुलिसकर्मियों की टीम तैनात की गई है, जिसमें एक ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर (TSI) और एक मुख्य आरक्षी या आरक्षी (कांस्टेबल) शामिल हैं। सब-इंस्पेक्टर के पास मौके पर ही ट्रैफिक डायवर्जन लागू करने, चालान करने या त्वरित निर्णय लेने का वैधानिक अधिकार होगा, जिससे कंट्रोल रूम से किसी अतिरिक्त आदेश की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

रूट मार्शलों की यह विशेष बाइक दस्ता पूरी तरह से हाई-टेक उपकरणों से सुसज्जित है। फील्ड में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों के पास आधुनिक वायरलेस हैंडसेट, भीड़ को नियंत्रित करने और निर्देश देने के लिए हाई-डेसिबल लाउड हीलर, शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर नजर रखने के लिए डिजिटल ब्रेथ एनालाइजर तथा ओवर-स्पीडिंग पर रोक लगाने के लिए पोर्टेबल स्पीडोमीटर दिए गए हैं। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा किट और सड़कों पर खराब हुए वाहनों को किनारे करवाने के लिए आवश्यक टोइंग रस्सियां भी इन दस्तों के पास मौजूद रहेंगी, जिससे सड़क पर पैदा होने वाले अवरोध को तत्काल हटाया जा सके।

4. हर दिन 70 से 100 किलोमीटर गश्त: गूगल मैप्स और ITMS कैमरों की लाइव निगरानी से सेकंडों में पहुंचेगी मदद

आरटीसी प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी ताकत इसका आधुनिक तकनीक और डिजिटल सर्विलांस के साथ त्रिस्तरीय समन्वय है। ट्रैफिक पुलिस ने इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तीन मजबूत तकनीकी स्तंभ तैयार किए हैं। पहला स्तंभ है इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), जिसके तहत लखनऊ शहर के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर लगे हजारों हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड 24 घंटे स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम में देखी जा रही है। जैसे ही किसी स्क्रीन पर वाहनों की कतार लंबी दिखती है, कंट्रोल रूम ऑपरेटर तुरंत उस इलाके के सब-रूट मार्शल को वायरलेस पर जीपीएस लोकेशन के साथ अलर्ट भेज देता है।

परियोजना का दूसरा अहम हिस्सा गूगल मैप्स के रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा का उपयोग है। ट्रैफिक पुलिस के तकनीकी सेल द्वारा गूगल मैप्स पर लाल और गहरे लाल रंग से चिह्नित होने वाले कंजेशन प्वाइंट्स पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी सड़क पर लाल लकीर बनते ही सिस्टम को पता चल जाता है कि वहां ट्रैफिक की गति अवरुद्ध हो रही है, जिससे जाम विकराल रूप लेने से पहले ही नजदीकी मार्शल बाइक वहां पहुंच जाती है। तीसरा स्तंभ इन मार्शलों की दैनिक गतिशीलता है। प्रत्येक सब-रूट मार्शल रोजाना लगभग 70 से 100 किलोमीटर तक अपने निर्धारित रूट पर पेट्रोलिंग करेगा। लगातार मूवमेंट में रहने के कारण किसी भी कॉल या सूचना पर टीम का रिस्पॉन्स टाइम घटकर मात्र 3 से 5 मिनट के भीतर आ जाएगा।

5. जलभराव, वाहन ब्रेकडाउन और प्रदर्शन: आपात स्थितियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण

राजधानी लखनऊ की सड़कों पर सामान्य दिनों के अलावा कई ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। मॉनसून के दिनों में भारी वर्षा के कारण कई अंडरपास और चौराहों पर जलभराव हो जाता है, जिससे गाड़ियां बंद पड़ जाती हैं। इसके अलावा, राज्य का राजनीतिक केंद्र होने के कारण चारबाग, विधानसभा मार्ग, दारुलशफा, हजरतगंज और गांधी प्रतिमा पर आए दिन होने वाले विरोध प्रदर्शन, रैलियां और घेराव आम जनता की रफ्तार पर ब्रेक लगा देते हैं। हाल ही में लक्ष्मण मेला फ्लाईओवर की मरम्मत, कैसरबाग डिपो की बसों के ब्रेकडाउन और विभिन्न प्रदर्शनों के चलते नगर निगम चौराहे से हजरतगंज तक लगे भीषण जाम ने पूरे शहर को बंधक बना लिया था।

आरटीसी प्रोजेक्ट को विशेष रूप से ऐसी आपात और अप्रत्याशित स्थितियों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। नए प्रोटोकॉल के अनुसार, जैसे ही कहीं जलभराव या बड़ा प्रदर्शन शुरू होगा, संबंधित रूट मार्शल सबसे पहले मौके पर पहुंचकर ट्रैफिक को समानांतर गलियों और वैकल्पिक बाईपास मार्गों पर डायवर्ट करेंगे। यदि कोई भारी वाहन या बस बीच सड़क पर खराब होती है, तो क्रेन बुलाने तक का इंतजार किए बिना रूट मार्शल स्थानीय संसाधनों और ट्रैफिक पुलिस की क्रेन को तुरंत एक्टिवेट कराकर सड़क की कम से कम एक या दो लेन को तुरंत चालू करवाएंगे। इसका उद्देश्य उपलब्ध सड़क क्षमता का वैज्ञानिक और त्वरित उपयोग कर यातायात के प्रवाह को किसी भी सूरत में पूरी तरह रुकने न देना है।

6. पुराना ढर्रा खत्म, अब सिर्फ फिक्स पिकेट नहीं: मोबाइल रिस्पॉन्स मॉडल से आम जनता को कितना मिलेगा फायदा?

लखनऊ ट्रैफिक पुलिस के एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक राघवेंद्र सिंह के मुताबिक, अब तक शहर में ट्रैफिक प्रबंधन का तरीका काफी हद तक ‘फिक्स्ड पिकेट’ व्यवस्था पर आधारित था। इसका मतलब था कि पुलिसकर्मी चौराहों पर एक निश्चित बूथ या शेड के नीचे खड़े रहते थे। अगर चौराहे से 500 मीटर आगे किसी मोड़ पर दो गाड़ियों की टक्कर हो जाती थी या कोई ऑटो चालक बीच सड़क पर सवारी भरने लगता था, तो चौराहे पर खड़े सिपाही को इसकी जानकारी तब मिलती थी जब जाम बढ़कर चौराहे तक पहुंच जाता था।

आरटीसी प्रोजेक्ट ने इस पुराने और ढुलमुल ढर्रे को पूरी तरह बदल दिया है। यह व्यवस्था फिक्स्ड पिकेट के बजाय ‘मार्ग-आधारित और गतिशील’ (Route-Based and Dynamic) है। अब पुलिसकर्मी चौराहे पर खड़े होकर जाम लगने का इंतजार नहीं करेंगे, बल्कि वे लगातार उस 5 से 10 किलोमीटर के स्ट्रेच पर घूमते रहेंगे। इस गतिशीलता का सीधा मनोवैज्ञानिक असर नियम तोड़ने वाले चालकों पर भी पड़ेगा। सड़क किनारे बेतरतीब ई-रिक्शा, नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ियां और सड़क पर अवैध कब्जा करने वाले वेंडर्स पर निरंतर कार्रवाई होगी। इससे सड़कों की पूरी चौड़ाई वाहनों के आवागमन के लिए खुली रहेगी, जिससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल बसों और सबसे महत्वपूर्ण एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।

7. लखनऊ में जाम दिखे तो तुरंत करें संपर्क: हेल्पलाइन, कंट्रोल रूम और सोशल मीडिया से जुड़ेगी मार्शल ब्रिगेड

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरी तरह जन-केंद्रित बनाया गया है, जिसमें लखनऊ के आम नागरिकों की भागीदारी को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रूट मार्शलों का नेटवर्क केवल अपने आंतरिक कैमरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह जनता से मिलने वाले सीधे फीडबैक पर भी उतनी ही तेजी से काम करेगा। अगर कोई नागरिक लखनऊ की किसी भी सड़क पर असामान्य जाम, खराब ट्रैफिक सिग्नल, जलभराव या किसी वाहन के दुर्घनाग्रस्त होने की सूचना ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर, पुलिस कंट्रोल रूम (112) या ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (एक्स/ट्विटर, फेसबुक) पर टैग करके देता है, तो उस सूचना को सीधे संबंधित रूट मार्शल के हैंडसेट पर फ्लैश किया जाएगा।

आधुनिक तकनीक, तेज-तर्रार रेसर मोबाइल दस्ते और सटीक निगरानी के इस संगम से लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था में एक सकारात्मक क्रांति आने की उम्मीद है। 12 प्रमुख मार्गों से शुरू हुआ यह मॉडल यदि अपने उद्देश्यों पर खरा उतरता है, तो आने वाले दिनों में इसे कानपुर रोड, सीतापुर रोड, फैजाबाद रोड और सुलतानपुर रोड के आउटर हिस्सों में भी विस्तारित किया जाएगा। नवाबी शहर लखनऊ के बाशिंदों के लिए यह पहल जाम के रोजमर्रा के मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने और उनके कीमती समय व ईंधन को बचाने में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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