नई दिल्ली। जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, शरीर में बेचैनी, अत्यधिक पसीना, एसिडिटी, हॉट फ्लैशेज और स्किन से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। आयुर्वेद के अनुसार, ये सभी लक्षण शरीर में ‘पित्त दोष’ (Pitta Imbalance) के बढ़ने का संकेत हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट दीक्षा भावसार ने शरीर की अंदरूनी गर्मी को कम करने और मन को शांत रखने के लिए 10 बेहद सरल और प्रभावी तरीके बताए हैं, जो इस तपती गर्मी में आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं।
1. नारियल पानी: प्रकृति का इलेक्ट्रोलाइट
नारियल पानी शरीर को हाइड्रेटेड रखने का सबसे अच्छा स्रोत है। यह इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस करता है और पेट की गर्मी को तुरंत शांत करता है। इसे पीने का सही समय सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच है।
2. भीगी हुई किशमिश या मुनक्का
8-10 काली किशमिश को रातभर पानी में भिगोकर रखें। सुबह खाली पेट इनका सेवन करने से न केवल शरीर ठंडा रहता है, बल्कि यह हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में भी मददगार है। इसका पानी पीना भी काफी फायदेमंद होता है।
3. सबजा सीड्स (तुलसी के बीज)
एक चम्मच सबजा सीड्स को 15 मिनट पानी में भिगो दें। जब ये फूल जाएं, तो इन्हें नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ में मिलाकर पिएं। यह शरीर के तापमान को तुरंत कम करने और एसिडिटी भगाने में जादुई असर दिखाता है।
4. सौंफ का पानी
सौंफ पाचन को बेहतर बनाती है और शरीर की आंतरिक गर्मी (Body Heat) को सोख लेती है। रातभर पानी में भिगोई हुई सौंफ का पानी अगली सुबह छानकर पीने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या दूर होती है।
5. धनिया बीज का पानी
धनिया के बीज लिवर को डिटॉक्स करने और शरीर की गर्मी को कम करने के लिए जाने जाते हैं। एक चम्मच धनिया बीज को रातभर पानी में भिगोएं और सुबह इसे पिएं। यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में भी सहायक है।
6. गाय के घी से तलवों की मालिश
आयुर्वेद में गाय के घी (A2 Cow Ghee) को पित्त नाशक माना गया है। रात को सोने से पहले पैर के तलवों की गुनगुने घी से मालिश करने से नसें शांत होती हैं, शरीर की गर्मी कम होती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है।
7. शीतकारी प्राणायाम
यह एक ऐसा योग अभ्यास है जो शरीर को तुरंत ‘एसी’ जैसा अहसास देता है। रोजाना 5 मिनट शीतकारी प्राणायाम करने से तनाव कम होता है और शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
8. घी से नस्य क्रिया
दिमाग को शांत रखने और शरीर में अचानक बढ़ने वाली हीट को रोकने के लिए नाक में घी डालना (नस्य) बहुत प्रभावी है। गुनगुने गाय के घी की 1-2 बूंदें दोनों नथुनों में डालें। यह एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करता है।
9. इवनिंग वॉक (शाम की सैर)
सूरज ढलने के बाद 20-30 मिनट की सैर करें। इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, स्ट्रेस हार्मोन्स कम होते हैं और शरीर का तापमान नेचुरल तरीके से मेंटेन रहता है।
10. खान-पान में सावधानी
आयुर्वेद कहता है कि जो हम खाते हैं, वही हमारे शरीर का तापमान तय करता है। गर्मियों में इन चीजों से परहेज करें:
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वर्जित: ज्यादा मिर्च-मसालेदार खाना, शराब, कैफीन (चाय-कॉफी), फर्मेंटेड फूड और तले-भुने स्नैक्स।
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शामिल करें: ठंडी तासीर वाली चीजें और हल्का भोजन।
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